शूल योग में महा नवमी आज: सिद्धिदात्री के साथ कन्या पूजा का दिन, जानें मुहूर्त, मंत्र, आरती और महत्व

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ABC NEWS: आज 23 अक्टूबर सोमवार को दुर्गा नवमी है, जिसे महा नवमी भी कहते हैं. शारदीय नवरात्र के नौवें दिन दुर्गा नवमी होती है. पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दुर्गा नवमी का व्रत रखा जाता है. आज के दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं. दुर्गा नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्या पूजा और नवरात्रि हवन भी करते हैं. आज महा नवमी पर शूल शुभ योग बना है. इसके उपरांत सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा. इस दौरान शमी पूजा, अपराजिता पूजा एवं जयंती ग्रहण, नीलकंठ दर्शन, विजय यात्रा, पट्टाभिषेक का शुभ संयोग प्राप्त हो रहा है. यह आज यानी 23 अक्टूबर से शुरू होकर मंगलवार 24 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा. उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री से जानते हैं दुर्गा नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती, शुभ योग, कन्या पूजा आदि के बारे में.

महा नवमी 2023 शुभ मुहूर्त और तिथि

काशी पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री को समर्पित है. इस साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 अक्टूबर 2023 को रात 05 बजकर 25 मिनट से प्रारंभ होगी और 23 अक्टूबर को शाम 03 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी. दरअसल, इस बार उदया तिथि मान्य होने के कारण 23 अक्टूबर 2023, सोमवार को नवमी तिथि मनाई जाएगी.

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

आज यानी सोमवार को नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर को शाम 06:27 बजे से सुबह 07:30 बजे तक रहेगा. इसके बाद सुबह 23 अक्टूबर को 09:16 बजे से सुबह 10:41 बजे तक शुभ समय है. बता दें कि, सोमवार सुबह 7:30 से 9 बजे तक राहुकाल रहेगा, ऐसे में कन्या पूजन करना शुभ नहीं माना जाता है. वहीं, नवमी तिथि के अन्य कन्या पूजन मुहूर्त शाम 01:30 बजे से शाम 02:55 बजे तक, शाम 02:55 बजे से शाम 04:19 बजे तक और शाम 04:19 बजे से शाम 05:44 बजे तक हैं. ऐसे में इस शुभ मुहूर्त में आपको मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजा और नवरात्रि हवन कर लेना चाहिए. इस दौरान नवमी और दसवीं का संधि योग बन रहा है.

मां सिद्धिदात्री के मंत्र

‘ॐ सिद्धिदात्र्यै नम:।’

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

ज्योतिषियों के अनुसार, जिस तरह भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की तपस्या करके 8 सिद्धियां प्राप्ती की थीं, उसी तरह माता की विधि विधान से पूजा और मंत्रों के उच्चारण से अष्ट सिद्धि और बुद्धि की प्राप्ति हो सकती है. बता दें कि, मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. अच्छे वस्त्र धारण करके मां की पूजा का स्थल तैयार करें. चौकी पर मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा स्थापित करें और ध्यान करें. मां सिद्धिदात्री को प्रसाद का भोग लगाएं. माता को फल, फूल आदि अर्पित करें. ज्योति जलाकर सिद्धिदात्री मां की आरती करें. अंत में मां सिद्धिदात्री का आशीर्वाद लेते हुए पूजा समाप्त करें.

कन्या पूजा की विधि

देवी सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्या पूजन की व्यवस्था करें. घर पर कुमारी के लिए आसन बिछाएं. अपनी क्षमता के अनुसार, 1 से लेकर 9 की संख्या में कन्याओं को आमंत्रित करें. उनकी उम्र 2 से 10 वर्ष के बीच हो. कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन पर आमंत्रि करें. सभी कन्याओं और बालक को आसन पर बैठाएं. फिर पानी से उनके पांव धोएं. अक्षत्, फूल, चंदन या रोली से उनकी पूजा करें. फिर उनको पूड़ी, हलवा, खीर, काले चने, मिठाई आदि खाने के लिए परोसें. भोजन करने के बाद उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें. उनको उपहार और दक्षिणा देकर विदा करें.

मां सिद्धिदात्री की पूजा का लाभ

माता सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और मां की चार भुजाएं हैं. इसमें उन्होंने शंख, गदा, कमल, और चक्र लिया हुआ है. पुराणों के अनुसार, कहा जाता है कि भगवान शिव ने कठिन तपस्या करके मां सिद्धिदात्री से ही 8 सिद्धियां प्राप्त की थीं. मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही महादेव का आधा शरीर देवी का हो गया था और तब को अपने इस स्वरूप में अर्धनारीश्वर कहलाए थे. मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है. इसके अलावा, मां के भक्तों को रोग, शोक, और भय से मुक्ति मिलती है.

पारण का समय

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, नवरात्र व्रत का पारण 24 अक्टूबर 2023 को सुबह 06:27 बजे के बाद किया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि का व्रत नवमी तिथि पूर्ण होने के बाद दशमी तिथि में ही खोलना चाहिए.

देवी सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।।
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है।।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।।
तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे।।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अंबे सवाली।।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।।
जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।।

प्रस्तुति: भूपेंद्र तिवारी

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