बम बम भोले के जयकारों से गूंजे कानपुर के शिवालय, आंनेदश्वर मंदिर में 1 किमी. लंबी लाइन

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ABC NEWS: महाशिवरात्रि के मौके पर अपने भगवान के दर्शन को शिवालयों में आस्था का समुद्र उमड़ा हुआ है. हर कोई अपने भगवान को बस एक झलक देखकर उनको गंगाजल, दूध, फूल, इत्र से उनका श्रृंगार करना चाह रहा है. कानपुर के प्रसिद्ध मंदिर आनंदेश्वर और सिद्धनाथ मंदिर में भक्तों की 1 किमी. लंबी कतारें लगी हुई हैं. हर भक्त को एक सेकेंड पूजन के लिए दिया जा रहा है.

रात से ही शिवालयों में जुटे श्रद्धालु
शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर ही शहर शिवमय हो उठा. रंग-बिरंगी रोशनी से सजे शिवालय में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर तरफ ओम नम: शिवाय और बम-बम भोले गूंजने लगा. आनंदेश्वर समेत सभी शिव मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं. जागेश्वर मंदिर में शुक्रवार को मेहंदी व हल्दी की रस्म हुई. सिद्धनाथ, खेरेश्वर व वनखंडेश्वर में प्रभु की जयकारे लगते रहे.

रात 2 बजे खोल दिए गए पट
जागेश्वर मंदिर में महिलाओं ने माता पार्वती को मेहंदी लगाकर आशीर्वाद मांगा. प्रबंधन ने बाबा जागेश्वर को हल्दी का उबटन लगाया तो पूरा मंदिर प्रांगण भोले के जयकारों से गूंज उठा. पूजन के दौरान चंदन, चंदन का तेल, गोमुख के जल, गुलाब जल आदि से स्नान कराकर भगवान का भव्य शृंगार किया गया. वहीं आनंदेश्वर मंदिर रात 2 बजे मंगला आरती के बाद पट भक्तों के लिए खोल दिए गए थे.

रात 3 बजे खुले सिद्धनाथ मंदिर के कपाट
जाजमऊ के सिद्धनाथ मंदिर में रात तीन बजे रुद्राभिषेक हुआ. शहर के सभी शिव मंदिरों नागेश्वर मंदिर, पनकी के शिवमंदिर, भोलेश्वर मंदिर बर्रा बाईपास, खेरेपति मंदिर मालरोड में भक्तों का उल्लास रात से ही देखने को मिला. यहां भक्त रात से ही लाइनों में लग गए थे.

जागेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़
देर रात ही जागेश्वर मंदिर के पट भी भक्तों के खोल दिए गए. पगड़ी पहने बाबा का मनमोहक स्वरूप भक्तों को आकर्षित कर रहा था। भक्तों ने प्रभु की आरती भी उतारी. सभा के गोपाल तुलस्यान, विजय पांडेय, कोषाध्यक्ष, अतुल गुप्ता, सत्यम गुप्ता, अरविंद गुप्ता, योगेश गुप्ता, राजा बाबू और नीरज गुप्ता आदि मौजूद रहे.

फलों से किया प्रभु का शृंगार
कौशलपुरी स्थित श्री प्रेम प्रकाश आश्रम के 46 वें स्थापना दिवस व महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में संत श्री भोलाराम ने भक्तों सहित श्रीमद्भगवत गीता एवं श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ के शुभ पाठों का आरंभ किया. सुंदरकांड पाठ का आयोजन व प्रांगण में विराजमान नर्मदेश्वर महादेव का पुष्पों से शपृंगार किया गया. फलों से शिव का शृंगार कर भजन संध्या हुई. भगवान श्री नर्मदेश्वर महादेव जी का सूखे मेवों से सजाकर पूजन किया गया.

64 वर्षों बाद बना है त्रिग्रही योग
ज्योतिषाचार्य योगेश अवस्थी ने बताया कि कुंभ राशि पर सूर्य शनि चंद्र का त्रिग्रही योग बना है. महासंयोग शनि प्रदोष व शनि की राशि अर्थात कुंभ राशि में सूर्य शनि और चंद्रमा रोग हंता महा संयोग बना रहे हैं. चीनी, जल और दूध मिलाकर चढ़ाने मात्र से शरीर के सारे कष्टों का एक साथ निवारण हो जाएगा.

इस बार सूर्य, चंद्र और शनि यह अद्भुत और महासंयोग बना है. शिवरात्रि का यह महासंयोग 64 वर्षों बाद आया है. भक्त अर्घे पर पहले जल चढ़ाएं फिर भगवान शिव पर, साथ ही हथेलियों को खोलकर शिवलिंग का स्पर्श करें. भगवान शिव की पूजा के दौरान आंखें खुली रहें। तांबे के पात्र से दूध ना चढ़ाएं और अरघे पर कोई वस्तु ना रखें. प्रसन्न मन से भगवान शिव की पूजा करें.

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