Kanpur: मुश्किल हुई डगर, जाम से निकना दूभर, उत्तर से दक्षिण जाना पहाड़ चढ़ने जैसा

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ABC News: दो साल तक जिम्मेदार सोते रहे और कानपुर में दुश्वारियां बढ़ती गईं. बारिश में पूरा शहर तालाब बन गया क्योंकि कोरोना काल में किसी ने जलभराव से निपटने की सुध ही नहीं ली. अब जब दो साल बाद दिवाली जैसे त्योहार का उत्साह अपने पूरे शबाब पर है तो ये भी पता चल रहा है कि ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए भी अफसरों ने कुछ नहीं किया. इसलिए शहरियों को रोज जाम के झाम से दो-चार होना पड़ रहा है. त्योहार के उल्लास में चौतरफा जाम मुसीबत का सबब बन गया है.

गुरुवार को भी सुबह से ही शहर की सड़कों पर जाम का सिलसिला शुरू हो गया और दोपहर आते-आते हर सड़क पर भीषण जाम लगने लगा. इसके लिए ऑफिस-स्कूल आने-जाने वालों को तो दिक्कतें हुई हीं, दोपहर में दिवाली की खरीदारी के लिए निकलने लोगों पर भी आफत मंडराने लगी. दक्षिण को उत्तर से जोड़ने वाले गोविंदपुरी पुल, टाटमिल का नया-पुराना पुल, घंटाघर पुल सब पर वाहन ज्यों के त्यों खड़े हो गए. बीच में माल लादकर घुसे साइकिल ठेला वालों ने और भी मुसीबत पैदा कर दी. घंटाघर चौराहे से बढ़ते ही कलक्टरगंज थाने के ठीक सामने बनीं किराना की दुकानों का सामान बीच सड़क ही वाहनों पर लोड-अनलोड होने से ये रोड भी जाम हो गई. मूलगंज चौराहा पर चारों ओर से वाहनों के आने से ट्रैफिक ही चोक हो गया. एक्सप्रेस रोड, कैनाल रोड, सुतरखाना, नयागंज जाने वाले रास्तों पर भी भीषण जाम दिखा. नयागंज में वाहनों की भीड़ से निकलना मुश्किल सा लगा. वहीं, लाटूश रोड से मेस्टन रोड जाने वाला रास्ता भी जाम में हांफता रहा. मेस्टन रोड से बड़ा चौराहा आना भी जंग जीतने जैसा रहा.

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