सर्वार्थ सिद्धि योग में दुर्गा अष्टमी आज: महागौरी के साथ कन्या पूजन, जानें मुहूर्त, मंत्र और आरती

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ABC NEWS: आज 22 अक्टूबर रविवार को दुर्गा अष्टमी है, जिसे महा अष्टमी भी कहते हैं. शारदीय नवरात्र के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी होती है. पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाता है. आज के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करते हैं. इनको आठवीं नवदुर्गा भी कहा जाता है. दुर्गा अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा के बाद कन्या पूजा और नवरात्र हवन भी करते हैं. नवरात्र का हवन महानवमी के दिन भी होता है. आज दुर्गा अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि समेत दो शुभ योग बने हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं दुर्गा अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती, शुभ योग, कन्या पूजा आदि के बारे में.

शुभ मुहूर्त और तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि की शुरूआत 21 अक्टूबर को रात 09 बजकर 53 मिनट से हो गई थी और यह ति​थि आज शाम 07 बजकर 58 मिनट तक मान्य रहेगी. व्रत के लिए उदयातिथि की मान्यता है, इसलिए दुर्गा अष्टमी का व्रत आज है.

दुर्गा अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:26 बजे से लेकर शाम 06:44 बजे तक है और रवि योग शाम 06:44 बजे से कल सुबह 06:27 बजे तक है. आज का अभिजित मुहूर्त दिन में 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक है.

मां महागौरी पूजा का मुहूर्त
आज के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:26 बजे से शाम तक है. ऐसे में आपको मां महागौरी की पूजा, कन्या पूजा और नवरात्रि हवन सर्वार्थ सिद्धि योग में कर लेना चाहिए. पूजा के समय राहुकाल का ध्यान रखें. आज का राहुकाल शाम 04:20 बजे से शाम 05:45 बजे तक है. दुर्गा अष्टमी पर भद्रा सुबह 06:26 से सुबह 08:58 बजे तक है.

मां महागौरी का पूजा मंत्र
ओम देवी महागौर्यै नमः.

पूजा विधि
आज आप शुभ मुहूर्त में सबसे पहले मां महागौरी का गंगाजल से अभिषेक करें. फिर देवी महागौरी को अक्षत्, सिंदूर, पीले फूल, फल, धूप, दीप, नैवेद्य, वस्त्र आदि चढ़ाएं. देवी महागौरी को प्रसन्न करने के लिए नारियल का भोग लगाएं. चाहें तो नारियल से बनी ​मिठाई, पूड़ी, हलवा, खीर, काले चने आदि भी अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद दुर्गा चालीसा पढ़ें. अंत में मां महागौरी की आरती करें. उसके बाद नवरात्रि का हवन करें. फिर कन्या पूजा करके आशीर्वाद ग्रहण करें.

कन्या पूजा की विधि
देवी महागौरी की पूजा करने के बाद कन्या पूजन की व्यवस्था करें. घर पर कुमारी के लिए आसन बिछाएं. अपनी क्षमता के अनुसार, 1 से लेकर 9 की संख्या में कन्याओं को आमंत्रित करें. उनकी उम्र 2 से 10 वर्ष के बीच हो. कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन पर आमंत्रि करें. सभी कन्याओं और बालक को आसन पर बैठाएं. फिर पानी से उनके पांव धोएं. अक्षत्, फूल, चंदन या रोली से उनकी पूजा करें. फिर उनको पूड़ी, हलवा, खीर, काले चने, मिठाई आदि खाने के लिए परोसें. भोजन करने के बाद उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें. उनको उपहार और दक्षिणा देकर विदा करें.

 पूजा का लाभ
सफेद वस्त्र पहने बैल पर सवार चार भुजाओं वाली देवी महागौरी हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं. उनकी पूजा करने से आयु, सुख और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है. पाप, दुख और कष्ट से मुक्ति मिलती है. मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

देवी महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवास॥ जय महागौरी…

चंदेर्काली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता। कोशकी देवी जग विखियाता॥ जय महागौरी…

हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती ‘सत’ हवं कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥ जय महागौरी…

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आने वाले का संकट मिटाया॥ जय महागौरी…

शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥ जय महागौरी…

प्रस्तुति: भूपेंद्र तिवारी

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