आखिर क्यों भगवान शिव को मांगनी पड़ी थी देवी अन्नपूर्णा से भिक्षा, पढ़ें रोचक कथा

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ABC NEWS: हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस साल अन्नपूर्णा जंयती 08 दिसंबर 2022 को पड़ेगी. अन्नपूर्णा जयंती के दिन माता पार्वती की पूजा करने का विधान है. इस दिन जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और निष्ठा से व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसके घर पर कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद सदैव घर पर बना रहता है. अन्नपूर्णा जयंती से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब पृथ्वी पर जल और अन्न की कमी हो गई थी तो सभी प्राणियों के बीच हाहाकर मच गया था.

पृथ्वी पर प्राणियों के जीवन रक्षा के लिए भगवान शिव को भिक्षुक का रूप धारण कर देवी अन्नपूर्णा से भिक्षा मागंनी पड़ी थी. दिल्ली के आचार्य गुरमीत सिंह जीसे जानते हैं अन्नपूर्णा जयंती से जुड़ी भगवान शिव और देवी अन्नपूर्णा की इस पौराणिक कथा के बारे में.

अन्नपूर्णा जयंती कथा
अन्नपूर्णा जयंती की पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार पृथ्वी पर सूखा पड़ गया. इस कारण जमीन बंजर हो गई और फसलें सूख गईं. जिस कारण अन्न और जल का अभाव हो गया. फल, अनाज और पानी को लेकर पृथ्वी पर हाहाकार मच गया.

मानव और पशु-पक्षी सभी का जीवन संकट में आ गया. तब लोगों ने इस समस्या के निदान के लिए भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी की पूजा की. पृथ्वीवासियों के कल्याण के लिए शिवजी ने भिक्षुक का रूप धारण किया और माता पार्वती ने मां अन्नपूर्णा का अवतार लिया. भिक्षुक के रूप में भगवान शिव ने देवी अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी. उन्होंने भिक्षा में अन्न मांगा.

दान में मिले इस अन्न को भगवान शिव ने पृथ्वी लोक के सभी प्राणियों में बांट दिया. इस तरह फिर से पृथ्वी धन-धान्य से भर गई. इस घटना के बाद से ही प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि के दिन को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत हुई.

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