5 एकड़ में परिसर, 108 फीट ऊंचा शिखर, 10 गर्भगृह… अनोखा होगा कल्कि धाम मंदिर, PM मोदी आज करेंगे शिलान्यास

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ABC NEWS: जिस धरती पर भगवान विष्णु के आखिरी अवतार का जन्म होने की मान्यता है, उस पवित्र जगह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल्कि भगवान के मंदिर का आज शिलान्यास करने जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में संभल के एंकरा कंबोह इलाके में कल्कि मंदिर बनने जा रहा है, जिसका शिलान्यास पीएम मोदी आज सोमवार को करेंगे. कल्कि धाम के शिलान्यास कार्यक्रम के लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं. इस मंदिर को सफेद और भगवा रंग से सजाया जा रहा है. कल्कि मंदिर कैसा बनेगा, क्या हैं इसकी खासियत और क्यों भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को रहस्यमयी कहा जाता है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

कल्कि मंदिर की खासियतें
इस मंदिर का निर्माण भी राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित बंशी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों से होगा. गुजरात के सोमनाथ मंदिर और अयोध्या राम मंदिर का निर्माण भी यहीं के पत्थरों से हुआ है. मंदिर का निर्माण 11 फीट  ऊंचे चबूतरे पर होगा, इसके शिखर की ऊंचाई 108 फीट होगा. मंदिर में 68 तीर्थों की स्थापना होगी, जबकि कहीं भी स्टील या लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. कल्कि धाम में भगवान कल्कि के नए विग्रह की स्थापना होगी, जबकि पुराना कल्कि पीठ यथावत बना रहेगा.

मंदिर का निर्माण शुरू

कल्कि को भगवान विष्णु का 10वां और आखिरी माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि कलयुग के अंत में विष्णु भगवान कल्कि अवतार में प्रकट होंगे. कल्कि धाम को दुनिया का अनोखा मंदिर कहा जा रहा है क्योंकि यह पहला ऐसा धाम है जहां भगवान के अवतार लेने से पहले ही उनके मंदिर का निर्माण हो रहा है. इस मंदिर में एक नहीं बल्कि 10 गर्भगृह होंगे, जिसमें भगवान विष्णु के 10 अवतारों को दस अलग-अलग गर्भगृह स्थापित किया जाएगा.

राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल पत्थरों का होगा प्रयोग

संभल में इस कल्कि धाम का निर्माण गुलाबी रंग के उस पत्थर से किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल अयोध्या के राम मंदिर और सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया गया था. इस मंदिर के शिखर की ऊंचाई 108 फीट होगी और 11 फीट के ऊपर मंदिर का चबूतरा बनेगा. साथ ही इस मंदिर में स्टील या लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. कल्कि मंदिर का निर्माण लगभग 5 एकड़ में किया जाएगा और इसके निर्माण में 5 साल तक का समय लग सकता है. संभल में स्थित कल्कि पीठ अपनी पहले वाली जगह पर ही रहेगा और जब कल्कि धाम बनकर तैयार हो जाएगा. तब उसके लिए भगवान का नया विग्रह होगा. इसके लिए एक अद्भुत प्रतिमा लाई जाएगी, जिसकी विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. यह धाम भवन के दृष्टिकोण से भव्य और धार्मिक दृष्टिकोण से दिव्य होगा.

संभल के कल्कि मंदिर के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 18 साल पहले ये संकल्प लिया था कि जहां भगवान के अवतार जन्म लेंगे, वहां भगवान का कल्कि धाम बनेगा. ऐसी मान्यता है कि जब कलयुग में पाप का घड़ा जब पूरी तरह भर जाएगा, तब भगवान कल्कि अवतार लेंगे और सभी पापियों का नाश करेंगे. कलयुगी अवतार होने की वजह से ही उन्हें कल्कि कहा गया है.

सफेद घोड़े पर सवार होंगे भगवान कल्कि

धर्मग्रंथों में वर्णन है कि जब भगवान कल्कि का अवतार का जन्म होगा तो भगवान शिव के द्वारा उन्हें देवदत्त नाम का सफेद घोड़ा भी साथ दिया जाएगा. ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम कल्कि अवतार को खड्ग देंगे और भगवान बृहस्पति उनको शिक्षा-दीक्षा प्रदान करेंगे. इन्हीं बातों का ध्यान रखते हुए ही कल्कि स्वरूप में भगवान का विग्रह होगा.

मंदिर में स्थित है सफेद घोड़ा

इस मंदिर के खुले अहाते में एक गुमटी जो चारों ओर से जाली के पत्थरों से ढकी है. इस गुमटी में पीले संगमरमर से घोडे़ की मूर्ति स्थापित है. इस घोड़े पर ही भगवान कल्कि सवार होंगे. इस घोड़े के तीन पैर जमीन पर हैं और आगे का एक पैर ऊपर उठा है. लोगों का मानना है कि पैर यह धीरे-धीरे नीचे झुक रहा है. यह भी माना जाता है कि घोड़े के इस पैर पर घाव बना हुआ है और जिस दिन ये घाव भर जाएगा, उस दिन भगवान विष्णु के कलयुगी अवतार कल्कि का जन्म होगा.

हिंदू धर्म ग्रंथों में इस बात का वर्णन मिलता है कि जब-जब इस धरती पर पाप और अन्याय बढ़ा है तब-तब भगवान विष्णु अलग-अलग रूप में धरती पर आकर पापियों का नाश किया है. शास्त्रों में विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से वे वामन अवतार, नरसिंह अवतार, मत्स्य अवतार, राम अवतार, कृष्ण अवतार आदि के रूप में प्रकट हो चुके हैं लेकिन कलयुग में उनका अंतिम अवतार आना अभी बाकी है. धार्मिक मान्यता है कि कि जब कलयुग में पाप अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगा, तब विष्णु जी भगवान कल्कि का अवतार लेकर कलयुग का अंत करेंगे.

रहस्यमयी है भगवान विष्णु का कल्कि अवतार

आज भी कल्कि अवतार लोगों के लिए एक रहस्य है. श्रीमद्भगवद्गीता पुराण के बारहवें स्कन्द में उल्लेख है कि भगवान का कल्कि अवतार कलयुग के अंत और सत्ययुग के संधि काल में होगा. शास्त्रों में कल्कि अवतार से सम्बंधित एक श्लोक में यह भी उल्लेख किया गया है जो कि इस प्रकार है-

सम्भल ग्राम मुख्यस्य, ब्राह्मणस्य महात्मनः। भवने विष्णु यशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।

इसका अर्थ है कि संभल में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के बेटे के रूप में भगवान कल्कि का जन्म होगा. कल्कि भगवान देवदत्त नाम के घोड़े पर सवार होकर अपनी तलवार से दुष्टों का संहार करेंगे, तब से ही सत्ययुग की शुरुआत होगी. भगवान विष्णु का कल्कि अवतार मिस्सकलंक अवतार के नाम से भी जाना जाएगा.

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