सचेंडी हादसे के खौफनाक मंजर स्वजनों की चीत्कार से दहल उठीं हास्पिटल की दीवारें

ABC NEWS: कानपुर-इटावा हाईवे पर हुए हादसे ने एक नहीं दो नहीं न जाने कितने परिवारों के कुलदीपकों को बुझा दिया. इस भयावह दुर्घटना के बाद इस बात से कदाचित इन्कार नहीं किया जा सकता है कि हादसे ने कई परिवारों की रीढ़ तोड़ दी. मंगलवार रात 11 बजे एलएलआर अस्पताल का वो खौफनाक मंजर ही था जब कोई मां अपने बेटे के लिए, बहन अपने भाई या फिर पुत्र अपने पिता को खून से सने कपड़ों में लिपटता देख आंसुओं को रोक नहीं पा रहा था.

चहुंओर गूंजती चीत्कार और रोने की आवाजें वहां मौजूद लोगों को भी रोने पर मजबूर कर रही थीं. हादसे के बाद से घबराए ग्रामीणों को इसका जरा भी अहसास नहीं था कि मौत बनकर आयी बस उनके ही परिवार की रीढ़ तोड़ दी है.

जवान बेटों के शव देख छाती पीटते रहे पिता

तीन जवान बेटों के शव स्ट्रेचर पर पड़े देखकर लाल्हेपुर के धनीराम छाती पीटते हुए ऊपर वाले को कोस रहे थे. हादसे का शिकार होने वाले लाल्हेपुर गांव निवासी राम मिलन, शिवभजन और लवलेश सगे भाई थे. इनके परिवार में पिता धनीराम, मां गीता देवी, दो बड़े भाई अजय, नीरज और बहने उर्मिला निर्मला हैं. धनीराम किसानी करते हैं. दो बड़े बेटों की शादी हो चुकी है. अजय ने बताया कि रात की शिफ्ट थी. तीनों भाई एक साथ ही ड्यूटी आते जाते थे. शाम को 7.30 बजे वह घर से ड्यूटी जाने के लिए निकले थे. कुछ ऐसा ही हाल गांव के त्रिभुवन सिंह यादव का भी था. उनके भी दो बेटों की हादसे में मौत हुई थी। परिवार की महिला बेसुध होकर एक ही बात कह रहीं थी कि हाय मेरे लाल रोटी कमावन गए हते मौत तुमका लील गई.

खबरों से जुड़े लेटेस्ट अपडेट लगातार हासिल करने के लिए आप हमें  Facebook, Twitter, Instagram पर भी ज्वॉइन कर सकते हैं … Facebook-ABC News 24 x 7 , Twitter- Abcnews.media Instagramwww.abcnews.media

You can watch us on :  SITI-85,  DEN-157,  DIGIWAY-157


For more news you can login- www.abcnews.media