सस्ती दरों पर प्याज बेचने का करिश्मा, विधायक बोले जनता के नकारे नेता का प्रतिशोध

ABC News: प्याज की बढ़ी कीमतों को लेकर सियासी रार भी शुरू हो गई है. इसके विरोध में जहां कांग्रेस नेता करिश्मा ठाकुर, विधायक सुरेंद्र मैथानी के आवास के बाहर प्याज बेचने के लिए बैठ गईं, वहीं विधायक ने इससे सस्ती लोकप्रियता और जनता द्वारा नकारे जाने का प्रतिशोध बताया है.

हालांकि इस प्रदर्शन के बाद विधायक ने पांच दिन पहले मुख्यमंत्री को ​लिखे एक पत्र की कॉपी को भी जारी किया, जिसमें प्याज की बढ़ी कीमतों की वजह से जनता को हो रही कष्ट की बात कही गई है.
प्याज की कीमतों के आसमान छूने के बाद से ही यह आम आदमी की थाली से दूर हो गया है. लंबा समय गुजर जाने के बाद भी प्याज की कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही है. प्याज की इसी बढ़ी कीमतों के विरोध में बुधवार दोपहर को कांग्रेस नेता करिश्मा ठाकुर अपने समर्थकों के साथ भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी के पांडुनगर स्थित आवास पहुंच गईं. करिश्मा ने यहां पर आम जनता से प्याज के बढ़े दामों को लेकर उनकी पीड़ा भी पूछी. सभी ने यह बताया कि प्याज न होने की वजह से खाने का जायका बिगड़ गया है.

सरकार विरोधी नारेबाजी कर सस्ती दरों पर बेचा प्याज
कांग्रेस नेता करिश्मा ठाकुर ने यहां पर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सस्ती कीमतों पर प्याज बेचा. हालांकि, वह अपने साथ जो प्याज लाई थीं, उसकी मात्रा तो ज्यादा नहीं थी लेकिन विरोध दर्शाने के लिए उन्होंने यहां पर 20 रूपए प्रतिकिलो की दर से जनता के बीच प्याज की बिक्री की. यह देखकर यहां पर लोगों का मजमा लग गया.

विधायक पहले बोले मैं भी प्रदर्शन में शामिल
अपने घर के बाहर जब कांग्रेस के इस प्रदर्शन की खबर विधायक सुरेंद्र मैथानी को लगी, तो वह वापस होने लगे. इससे पहले उन्होंने अपने वॉट्सएप से संदेश प्रचारित किया कि वह दलगत राजनीति से उपर उठकर सभी के विधायक हैं. विधायक ने कहा कि वह खुद कांग्रेस नेता करिश्मा ठाकुर के प्रदर्शन में शामिल होने पहुंच रहे हैं.

फिर बोले मुझ पर आरोप लगाना मज़ाक, जनता के नकारे जाने का है प्रतिशोध
इसके बाद विधायक सुरेंद्र मैथानी ने मीडिया से प्रेस रिलीज़ जारी की. इस प्रेस रिलीज़ में विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि मात्र एक माह और 11 दिन के विधायक पर इस तरह से कांग्रेस नेता करिश्मा ठाकुर का आरोप लगाना मज़ाक है. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की सस्ती लोकप्रियता पाने का हिस्सा, जनता के द्वारा नकारे जाने का प्रतिशोध और उनकी असफल नीति का परिचायक है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पांच दिन पहले ही उन्होंने पत्र भेजकर सीएम योगी आदित्यनाथ का इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण कराया है.


रिपोर्ट: सुनील तिवारी

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