महाकाल मंदिर पुलिस की नाकेबंदी भांपने के बाद ही सरेंडर को मजबूर हुआ विकास दुबे

ABC NEWS: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुँचने के बाद जब विकास दुबे को लगा कि अब वह पुलिस की गिरफ्त से बच नहीं पाएगा तब उसने सरेंडर करने का इरादा बनाया ताकि एंकाउंटर से बच सके तभी उसने चिल्ला-चिल्ला कर मीडिया और पुलिस के सामने यह कहना शुरू किया कि मै विकास दुबे कानपुर वाला. यह निचोड महाकाल मंदिर की मुख्य सुरक्षा अधिकारी लेडी सिंघम रूबी यादव की बताई हुई उस स्टोरी से पूरी तरह मेल भी खाती है जो उन्होने एक प्रमुख tv chanel को बताई.

तब कबूला कि मैं ही विकास दुबे हूं

रुबी यादव ने बताया कि उसने मंदिर में ही कबूल लिया था कि वो विकास दुबे है. इस दौरान उसने हमारे एक गार्ड से हाथपाई भी की. उसने एक गार्ड का नेम प्लेट निकाल लिया और उसकी घड़ी तोड़ दी, उसके अंदर कोई डर नहीं था. हालांकि थोड़ी देर में एसपी और एरिया की पुलिस मौक पर आ गई और उसे हिरासत में ले लिया. रूबी यादव ने कई अहम खुलासे किए हैं. उन्होने बताया कि सुबह 7.15 बजे के करीब उनकी टीम राउंड पर थी तभी उन्हें जानकारी मिली कि एक फूलवाले ने विकास दुबे जैसे संदिग्ध को देखा है. फूलवाले ने ही हमारी टीम को कॉल किया था. फिर मैंने अपनी टीम से कहा कि जब तक हम कन्फर्म नहीं हो जाते तब तक उसको पकड़ना नहीं है. विकास दुबे बाहर घूम रहा था और कुछ भी कर सकता था. फिर हमारी टीम उसके पीछे लग गई. उसने 250 रुपये का टिकट लिया और शंख द्वार से एंट्री की, तब तक हमारी टीम ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया था.

हुलिया से पहचान मुश्किल थी 

फिर मैंने अपने सिक्युरिटी गार्ड से फोटो भेजने के लिए कहा, जो फोटो मेरे पास आई, उसमें उसका हुलिया बदला हुआ था. उसने बाल छोटे करा रखे थे, चश्मा और मास्क लगा रखा था और वो दुबला लग रहा था. हुलिया देखकर उसकी पहचान कर पाना मुश्किल लग रहा था. मैंने अपनी टीम को वॉच करने को कहा. जितनी देर में उसने दर्शन किए, उतनी देर में मैंने गूगल कर उसकी तस्वीर खंगाल ली. गूगल सर्च में वांटेड फोटो में उसके सिर पर चोट का निशान था. मेरे गार्ड ने जो फोटो भेजा था, उसे फिर मैंने जूम करके देखा तो उसके माथे पर चोट के निशान थे. इसके बाद मैं कन्फर्म हो गई कि ये विकास दुबे है, लेकिन मैंने ये बात अपनी टीम से शेयर नहीं की, ताकि कोई पैनिक ना हो.

फर्जी आईडी कार्ड था

इसके बाद मैंने एसपी साहब को फोनकर जानकारी दी. फिर मैंने अपने सुरक्षा गार्डों से कहा कि उसे आप लड्डू काउंटर पर बैठाइए और उसे शक नहीं होना चाहिए कि हम उसे वॉच कर रहे हैं. मैंने सुरक्षा गार्डों से कहा कि आप उससे आईडी कार्ड के बार में पूछें और दूसरी बात कीजिए. जब उससे नाम पूछा गया तो उसने अपना नाम शुभम बताया और जेब से आईकार्ड निकालकर दिया. इस आईकार्ड पर उसका नाम नवीन पाल था. वो फर्जी आई कार्ड के जरिए दबंगई के साथ घूम रहा था. जब विकास दुबे को यह लग गया कि अब पुलिस से बच नामुमकिन है तब उसने सरेंडर करने का एमएन बनाया और कबूल कर लिया कि वही है कानपुर में 8 पुलिसजनों को मौत के घाट उतारने वाला दरिंदा.

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