कानपुर में जीका को लेकर युद्ध स्तर पर बचाव कार्य शुरू,बुखार से अबतक 35 से ज्यादा मौतें

ABC NEWS: कानपुर में 57 वर्षीय एयरफोर्स कर्मी में जीका वायरस की पुष्टि के बाद दूसरे दिन भी बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. संक्रमित के घर पोखरपुर और परदेवनपुरवा में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सर्वे कर रहीं. 24 टीमें डेंगू के लार्वा नष्ट करने के अभियान में लगी हैं. एक किलोमीटर के दायरे में स्वास्थ्य टीमें लगाई गई हैं. बुखार रोगियों की तलाश हो रही है. मलेरिया और डेंगू की जांच के नमूने लिए जा रहे हैं. सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह के मुताबिक महामारी विशेषज्ञों की टीम अलग भ्रमण कर रही. नगर निगम के सहयोग से फागिंग का काम किया जा रहा है. सबसे जरूरी मच्छरों के सोर्स को खत्म करना है. उनका कहना है कि दहशत की कोई जरूरत नहीं है. मच्छरों से बचाव करें. वैसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से बचाव के सभी इंतजाम किए जा रहे हैं. एंटी लार्वा छिड़काव, सफाई, फागिंग कराई जा रही है. खुद भी घर के आस-पास मच्छरों को खत्म करें. बुखार पर स्वास्थ्य टीम को सूचित करें. सरकारी अस्पताल में दिखाएं.

उधर ग्रामीण अंचल में डेंगू व वायरल बुखार फैला है। ग्रामीण अंचल के कुरसौली, मकसूदाबाद, पारा प्रतापपुर, बकोठी व अन्य क्षेत्रों में बुखार व डेंगू से अब तक 35 से अधिक मौतें हो चुकी हैं. स्वास्थ्य विभाग डेंगू व बुखार की बात लगातार नकार रहा है. बावजूद इसके तह तक जाने का प्रयास भी नहीं किया गया है. हद तो यह है कि जिले में दो साल से संक्रामक रोगों का सर्विलांस सिस्टम भी पूरी तरह से निष्क्रिय है. इन बीमारियों को लेकर अलर्ट तक जारी नहीं हो रहा. शहरी क्षेत्र में जीका वायरस का मरीज मिलने के बाद से फिर से बीमारियों को चर्चा में ला दिया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि जब बुखार, डेंगू, मलेरिया, टायफाइड समेत अन्य बीमारियों की जांच में पुष्टि न हो, ऐसे में जीका वायरस की जांच जरूर करानी चाहिए. इस बार जिले में संक्रामक बीमारियों ने जमकर कहर बरपाया. उसके बाद भी जिला महामारी वैज्ञानिक ने संक्रमण की इपीडिमोलाजी जानने का प्रयास भी नहीं किया. हद तो यह है कि जिले में जिला महामारी वैज्ञानिक कार्यरत हैं या नहीं इसका भी किसी को पता नहीं चला. यही वजह रही कि मौतों व संक्रमण फैलने की तह तक जाने का प्रयास किसी ने प्रयास भी नहीं किया. मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों की रिपोर्ट से भी ऐसा प्रतीत हुआ कि यह भी दवाब में तैयार कराई गई.

पीडि़त छह माह से नहीं गया बाहर

जीका वायरस से संक्रमित एयरफोर्स कर्मचारी छह माह से कहीं बाहर भी नहीं गए. जीका वायरस के संक्रमण की उनकी हिस्ट्री का कुछ पता नहीं चल सका. ऐसे में सवाल यह उठता है कि वायरस उनके अंदर ही निष्क्रिय पड़ा था, जो बाद में सक्रिय हो गया. इस दौरान वह कहां-कहां गए, किस-किस को संक्रमित किया. इसका पूरा पता नहीं लगाया जा सका है.

महिलाओं की संख्या अधिक

कुरसौली गांव में हुई मौतों में महिलाओं की संख्या अधिक है. जीका वायरस महिलाओं एवं गर्भवती को सर्वाधिक चपेट में लेता है. ऐसे में महिलाओं के अधिक चपेट में आना भी जीका की तरफ इशारा करता है.

सीएमओ, कानपुर नगर डा. नैपाल सिंह के अनुसार कुरसौली व अन्य गांवों में सामान्य बुखार फैला था। गांव में मरने वाले किसी न किसी बीमारी से पीडि़त थे. सर्विलांस टीम ने घर-घर जाकर केस हिस्ट्री तैयार करने के साथ जांच भी कराई. मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में पानी के संक्रमित होने की रिपोर्ट दी थी, जिसकी पुष्टि जल निगम की रिपोर्ट से भी हुई है.

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