संसद में बोले राजनाथ- चीन की LAC में बदलाव की मंशा, पैंगोंग में घुसने की कोशिश की

ABC News: कोरोना वायरस के बीच संसद के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है. भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध के पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में बयान दिया. राजनाथ सिंह ने कहा कि यह एक बड़ा मुद्दा है और इसका हल शांतिपूर्ण और बातचीत से निकाला जाना चाहिए. सीमा पर शांति बनाए रखना जरूरी है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर हमारे जवानों से मुलाकात की. उन्होंने यह संदेश भी दिया था वह हमारे वीर जवानों के साथ खड़े हैं. मैंने भी लद्दाख जाकर अपने यूनिट के साथ समय बिताया था. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था. आप जानते हैं कर्नल संतोष मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था. रक्षामंत्री ने कहा कि मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था.

रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन मानता है कि ट्रैडिशनल लाइन के बारे में दोनों देशों की अलग-अलग व्याख्या है. दोनों देश 1950-60 के दशक में इसपर बात कर रहे थे लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया. चीन ने लद्दाख में बहुत पहले कुछ भूमि पर कब्जा किया था, इसके अलावा पाकिस्तान ने चीन को पीओके की भी कुछ भूमि चीन को सौंप दी. यह एक बड़ा मुद्दा है और इसका हल शांतिपूर्ण और बातचीत से निकाला जाना चाहिए. सीमा पर शांति बनाए रखना जरूरी है.

अभी LAC को लेकर दोनों देशों की अलग व्याख्या है. दोनों देशों के बीच शांति बहाल रखने के लिए समझौते हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि 1988 के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में विकास हुआ. भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंध भी विकसित हो सकते हैं और सीमा का भी निपटारा किया जा सकता है. हालांकि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ भी सकता है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि समझौते में कहा गया है कि जब तक सीमा का पूर्ण समाधान नहीं होता LAC का उल्लंघन नहीं किया जाएगा. 1990 से 2003 तक दोनों देशों में मिलीजुली सहमति बनाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद चीन इस दिशा में आगे नहीं बढ़ा. अप्रैल माह से लद्दाख की सीमा पर चीन के सैनिकों और हथियारों में वृद्धि देखी गई. चीन की सेना ने हमारी पेट्रोलिंग में बाधा उत्पन्न की जिसकी वजह से यह स्थित बनी. रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को भारी क्षति पहुंचाई है और सीमा की भी सुरक्षा की. हमारे जवानों ने जहां शौर्य की जरूरत थी शौर्य दिखाया और जहां शांति की जरूरत थी शांति रखी.

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि दोनों को यथास्थिति बनाए रखना चाहिए और शांति और सद्भाव सुनिश्चित करना चाहिए. चीन भी यही कहता है लेकिन तभी 29-30 अगस्त की रात्रि में फिर से चीन ने पैंगोंग में घुसने की कोशिश की लेकिन हमारे सैनिकों ने प्रयास विफल कर दिए.राजनाथ सिंह ने कहा कि सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारे जवान मातृभूमि की रक्षा में डटे हुए हैं. सशस्त्र सेना और ITBP की तेजी से तैनाती की गई है. पिछले कई दशकों में चीन ने बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्र्क्चर की गतिविधियां शुरू की है. इसके जवाब में सरकार ने भी बॉर्डर एरिया डिवेलपमेंट का बजट बढ़ा दिया है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा के इलाकों में अब सैनिक ज्यादा अलर्ट रह सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई कर सकते हैं. हमारे सीमावर्ती इलाकों में विवादों का हल शांतिपूर्ण ढंग से करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है. मैंने 4 तारीख को चीन के रक्षा मंत्री के सामने स्थिति को रखा. मैंने यह भी कहा कि हम इस मुद्दे को शांति से हल करना चाहते हैं. हमने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हम भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं.

राजनाथ सिंह ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीनी विदेश मंत्री से कहा कि अगर समझौतों को माना जाए तो शांति बहाल रखी जा सकती है. मैं यह भी सदन को स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. हमारे जवानों का जोश और हौसला बुलंद है. प्रधानमंत्री के जवानों के बीच जाने के बाद यह संदेश गया है कि भारत के सभी वासी उनके साथ खड़े हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि लद्दाख में हम एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं और हमें प्रस्ताव पारित करना चाहिए कि पूरा सदन जवानों के साथ खड़ा है. 

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