PM मोदी का हमला, बोले-जात-पात में बांटने थी कोशिश,UP ने समझ ली इनकी चालाकी

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ABC News: यूपी विधानसभा चुनाव के छठे चरण के तहत आज 10 जिलों की 57 सीटों के लिए मतदान चल रहा है. राजनीतिक दलों और नेताओं ने अब सातवें चरण के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इस बीच गुरुवार को पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने जौनपुर में चुनावी जनसभा को सम्‍बोधित करते हुए समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला. उन्‍होंने कहा कि घोर परिवारवादियों ने पूर्वांचल के लोगों को अपने हाल पर जीने के लिए छोड़ दिया था. घोर परिवारवादियों ने पूरी कोशिश की थी कि उत्तर प्रदेश जात-पात में बंट जाए. लेकिन यूपी के लोगों ने घोर परिवारवादियों की चालाकी को समझ लिया. आज यूपी एकजुट, एकमत खड़ा हो गया है.

पीएम ने सवाल उठाया कि कोरोना के मुश्किल समय में घोर परिवारवादी लोग कहां थे? ये लोग इस साजिश में जुटे थे कि भारत के टीके को बदनाम कैसे किया जाए. ये लोग इस संकट को और गंभीर बनाने के लिए काम कर रहे थे. पीएम ने केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गईं लोक कल्‍याणकारी योजनाओं का विस्‍तार से उल्‍लेख किया. उन्‍होंने लोगों से मतदान जरूर करने का आह्वान किया. पीएम मोदी ने कहा कि अब तक के मतदान ने भाजपा, अपना दल और निषाद पार्टी की सरकार बनाना तय कर दिया है. आज छठे चरण में भी भाजपा के पक्ष में जमकर मतदान हो रहा है, हमें अब ये सुनिश्चित करना है कि विजय 2017 जितनी ही प्रचंड होनी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र में एक-एक मत का महत्‍व है. हर मतदाता को मतदान जरूर करना चाहिए.

जौनपुर के बाद गुरुवार को पीएम मोदी ने चंदौली में भाजपा के प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कहा कि हम लोग सिर्फ कोरी बात नहीं करते हैं, बल्कि ठोस काम करके दिखाते हैं. उन्होंने कहा कि कोरी घोषणाओं के बजाय हमने सरकारी योजनाओं को उन लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया है, जिनके वो हकदार हैं और जिनको सरकार की योजनाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है. हमारी सरकार ही है जो महाराजा सुहेलदेव के योगदान को पूरे देश में लेकर गई है. वरना पहले वो भी एक जमाना था कि घोर परिवारवादियों को महाराजा सुहेलदेव सिर्फ चुनावों में याद आते थे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यूपी का हाल देखकर सपा-बसपा सहित तमाम महामिलावटी पूरी तरह पस्त हैं. याद कीजिए, इन्होंने मोदी हटाओ के नाम से चुनाव अभियान शुरू किया था. बेंगलुरु में एक मंच पर आकर एक दूसरे का हाथ पकड़ कर फोटो खिंचवाई थी. उसके बाद जैसेे ही प्रधानमंत्री पद की बात आई तो सब अपना-अपना दावा लेकर अपनी-अपनी डफली बजाने लगे. कोई आठ सीट वाला, कोई दस सीट वाला, कोई 20-22 सीटों वाला तो 30-35 सीट वाला भी, प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने लगा. सपने देखना गलत नहीं, लेकिन देश ने कहा-फिर एक बार… लोगों का जवाब आता है–मोदी-मोदी… ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उन्होंने देश को फिर कुछ जरूरी सवालों के जवाब देने की जरूरत नहीं समझी और न उनके पास ताकत थी. वे देश को नहीं बता पाए कि 21वीं सदी में देश को कैसी सरकार देंगे. नहीं बता पाए कि दर्जन भर चेहरे का स्वार्थ देशहित में कैसे हो सकता है. नहीं बता पाए कि साल-छह महीने में सरकारें गिरती रहेंगी तो देश का भला कैसे होगा, गरीब का भला कैसे होगा, विकास कैसे होगा. देश को अपने विकास का माडल नहीं बता पाए. राष्ट्ररक्षा, आतंकवाद, नक्सलवाद पर इनका क्या कहना है, नहीं पता पाए. उन्होंने अफवाह, गाली-गलौच का माडल पूरे चुनाव में देश के सामने रखा है. जातिवाद का माडल आपके सामने रखा है. इन्होंने डराने का, भय का, विरोध का माडल देश के सामने रखा है. सर्जिकल स्ट्रइक के विरोध का कोई कारण बनता है क्या? यह तो वीरों की धरती है. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक का विरोध क्या उचित है? सेना के पराक्रम का विरोध क्या उचित है? नागरिकता कानून. तीन तलाक कानून का विरोध, लोकपाल की नियुक्ति, शत्रु संपत्ति कानून लागू करने का विरोध, कदम-कदम पर मोदी का विरोध करना उचित है क्या.

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