ओटीएस स्कीम: छूट की आस में अब अधर में फंस गई बकायेदारों की आस, जानें कैसे

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ABC News: लखनऊ नगर निगम की तर्ज पर नगर निगम ने पहली बार बकायेदारों की सुविधा के लिए जिस OTS स्कीम से अपना खजाना भरने की सोची थी, उस पर अधर की फांस फंस गई है. दरअसल, शासन ने इस ओटीएस की स्कीम को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है. इससे नगर निगम अफसर भी पशोपेश में हैं। इसके बाद अब लखनऊ की स्कीम की पड़ताल की जा रही है.

लखनऊ नगर निगम ने अपने यहां बकायेदारों को राहत देते हुए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू की थी. वहां जिस तरह से जनता का रिस्पांस मिला, उसे देखते हुए कानपुर में भी महापौर प्रमिला पांडेय ने ओटीएस स्कीम को लागू करने का ऐलान किया. इस योजना में प्रथम दो माह में बकाया अदा करने पर 20 प्रतिशत की छूट और उसके बाद 10 प्रतिशत की छूट का ऐलान किया गया. इसके पीछे मकसद था कि एक तरफ जहां स्कीम का फायदे बकायेदार उठाएंगे, वहीं नगर निगम को भी काफी समय से फंसी रकम का भुगतान हो जाएगा. इस एकमुश्त समाधान योजना को कानपुर में भी हाथों-हाथ लिया गया.

जलकल विभाग ने पहले ही हाथ खड़े कर दिये थे
महापौर ने पूर्व में हुए कार्यकारिणी में जब प्रस्ताव पास कराया था तो उसके बाद बड़ी संख्या में लोग जलकल विभाग का बकाया अदा करने पहुंचे थे. उस समय जलकल विभाग ने एकमुश्त समाधान योजना का लाभ देने से हाथ खड़े कर दिये थे. इसके बाद इस स्कीम को लेकर काफी हायतौबा मची थी.

शासन के इन्कार के बाद अधर में फंसी सांस
कानपुर नगर निगम की एकमुश्त समाधान योजना को शासन की तरफ से रेड सिग्नल मिलने के बाद अब यहां के अफसर उसकी पड़ताल करने में लगे हैं. महापौर प्रमिला पांडेय का कहना है कि जिन्होंने अपना बकाया जमा किया है, वह तो ठीक है लेकिन जिनका ब्याज माफ हुआ है, उनके बारे में सोचा जा रहा है. आपको बता दें कि, अगर शासन नहीं मानता है तो एकमुश्त समाधान योजना में जिन्होंने फायदा उठाया था, तो उन्हें छूटे हुए ब्याज की रकम को उस पर लागू हुए ब्याज के साथ चुकानी पड़ेगी.

नगर आयुक्त ने कहा कि शासनादेश का अध्ययन कर रहें
इसको लेकर नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी का कहना है कि इस मामले में शासनादेश का अध्ययन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शासन ने लखनऊ नगर निगम के प्रस्ताव को किस तरह स्वीकार किया और कानपुर नगर​ निगम के प्रस्ताव को किस तरह से अस्वीकार किया, इसको देखा जा रहा है. इस अध्ययन के बाद एक बार फिर से शासन को छूट स्वीकृत करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा. इसके बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि ब्याज पर छूट की जो बड़ी आस थी, उस पर अब संशय के बादल मंडरा रहे हैं.


रिपोर्ट: सुनील तिवारी

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