विलय का विरोध: बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से 238 करोड़ का कारोबार हुआ ठप

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ABC News: बैंकों के विलय के विरोध में ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के आह्वान पर की गई हड़ताल का कानपुर में व्यापक असर देखा गया. बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल से 238 करोड़ के कारोबार को चोट लगी. यही नहीं इसे निजीकरण की साजिश बताते हुए बैंक कर्मचारियों ने कहा कि आम जनता भी इस मुद्दे पर विरोध करे नहीं तो पीएमसी बैंक के ग्राहकों की तरह पछताना पड़ेगा.

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का सुबह से ही व्यापक असर देखा गया. कानपुर शहर से लेकर देहात की शाखाओं के बाहर कर्मचारियों ने डेरा डाले रखा. बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर तैनात कर्मचारियों ने प्रशासनिक कार्यालय से लेकर शाखाओं को खुलने नहीं दिया. यूपी बैंक इम्पलाइज यूनियन के बैनर तले पीएनबी के बिरहाना रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया. यहां पर बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को जमकर कोसा.

हड़ताल से 238 करोड़ का कारोबार ठप
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से 138 करोड़ का लेनदेन ठप हो गया. इसमें 70 करोड़ से ज्यादा की ​क्लीयरिंग नहीं हो पायी. इसी तरह नकद जमा के रूप में 90 करोड़ और 78 करोड़ का नकद भुगतान नहीं हो पाया. यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश उपमहामंत्री रजनीश गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों की वजह से देश के बैंकिंग उद्योग का स्वास्थ्य खराब हो चुका है. एक अनुमान के अनुसार 7,95,000 करोड़ के डूबंत ऋण हो चुके हैं जिनकी वसूली के लिए बैंक तो प्रयास कर रही हैं लेकिन कठोर कदमों के अभाव में वसूली नहीं हो पा रही है. जानबूझकर कर्ज न अदा करने वालों पर आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की गई.

ग्राहकों पर लगने वाले शुल्क वापस लेने की मांग
इसके साथ ही बैंक कर्मचारियेां ने कहा कि ग्राहकों पर बेहिसाब शुल्क लगाकर उनकी जेब काटी जा रही है. इसे गलत ठहराते हुए शुल्क को बंद करने की मांग की गई. यूनियन अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि बैकिंग सुधारों के नाम पर कर्मचारियेां और ट्रेड यूनियन के अधिकारों के साथ कुठाराघात किया जा रहा है.

अभी से करें विरोध ताकि न हो पीएमसी बैंक जैसा हाल
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के संयुक्त मंत्री संजय त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र सरकार बैंकों के निजीकरण की साजिश रच रही है. इसी की दिशा में कदम बढ़ाते हुए बैंको का विलय किया जा रहा है. इसके बाद जब बैंक घाटे में जाएंगी तो इन्हें निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा. निजी क्षेत्र में जाने से इनमें जमा धन वह अपने कारोबार में लगाएंगे. उन्होंने कहा कि जनता को भी इस मुद्दे पर सरकार का विरोध करना चाहिए नहीं तो पीएमसी बैंक के ग्राहकों की तरह पछताना पड़ेगा. इस दौरान सुधीर सोनकर, राकेश तिवारी, विकास कपूर, अरूण भल्ला, सुधीर शर्मा, जीआर तिवारी समेत अन्य कर्मचारी नेताओं ने अपनी बात को रखा.


रिपोर्ट: सुनील तिवारी

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