दिमाग में घूमती हैं नकारात्मक बातें, शीतला अष्टमी के दिन करें ये उपाय, जानें शुभ मुहूर्त

ABC News: हर साल चैत्र के महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है. इसे बसौड़ा अष्टमी भी कहा जाता है. शीतला अष्टमी होली के आठवें दिन होती है. इस दिन माता शीतला की पूजा होती है और उन्हें बासी खाने का भोग लगाया जाता है. इस बार शीतला अष्टमी 4 अप्रैल को मनाई जाएगी. इस साल शीतला अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक है.

नाम के अनुसार ही शीतला माता को शीतल चीजें पसंद हैं. इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को चेचक, खसरा जैसे रोगों का प्रकोप नहीं रहता. मान्यता के अनुसार शीतला माता को ठंडी चीजें बहुत प्रिय होती है. शीतला सप्तमी और अष्टमी को ठंडी चीजों का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन व्रत रखने व विधि विधान से माता का पूजन करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं. इसके अलावा परिवार के सदस्यों व बच्चों का चेचक, खसरा, आंखों के रोग और मौसमी समस्याओं से बचाव होता है. ये भी कहा जाता है कि शीतला अष्टमी के दिन कुछ विशेष उपाय करने से तमाम तरह की परेशानियां दूर हो सकती हैं. जानिए उन उपायों के बारे में. अगर आपके दिमाग में अक्सर नकारात्मक विचार घूमते रहते हैं. आपको शीतला अष्टमी के दिन मातारानी की पूजा के बाद नीम के पेड़ की पूजा करनी चाहिए. नीम के पेड़ में जल देने के बाद सात बार परिक्रमा करें. इससे अंदर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है.

पूजा के दौरान मां शीतला को हल्दी भी अर्पित करें. पूजा के बाद ये हल्दी परिवार के सदस्यों को लगाएं. खासकर बच्चों को जरूर लगाएं. ऐसा करने से परिवार के सदस्यों और बच्चों की मौसमी रोगों के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से भी रक्षा होती है. अष्टमी वाले दिन माता शीतला पूजा करते समय उन्हें जल भी अर्पित करें. इसके बाद वो जल घर में लाएं और मुख्य द्वार के अलावा घर की सभी दिशाओं में छिड़कें. इससे घर की नकारात्मकता दूर होगी और सकारात्मक माहौल बनेगा.

माता शीतला का वाहन गधा है. इस दिन गधे की सेवा जरूर करें. इसके अलावा माता का प्रसाद किसी कुम्हारनी को दें. ऐसा करने से आपकी पूजा सफल हो जाती है. इससे माता प्रसन्न होती हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है व परिवार के संकट दूर होते हैं. मां शीतला की पूजा के बाद गाय माता का पूजन करें. हिंदू धर्म में मान्यता है कि गाय में तैंतीस कोटि देवताओं का वास होता है. गाय की सेवा करने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख समृद्धि और संपन्नता आती है.

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