बच्चों को संक्रमण से बचा सकता है MMR का टीका! नए शोध में किया गया दावा

ABC News: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के चलते देश बुरे दौर से गुजर रहा है. इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश के कई राज्यों में लॉकडाउन लगा हुआ है. इससे संक्रमितों की संख्या में कमी आई है. हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है. इस लहर से बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं. इस विषय पर कई शोध किए जा रहे हैं. इन शोधों में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन तरीकों से कोरोना वायरस की तीसरी लहर को टाला जा सकता है.

विशेषज्ञों की मानें तो बचाव ही सुरक्षा है. इसके लिए बच्चों की इम्यून सिस्टम पर ध्यान देना जरूरी है। साथ ही कई शोध में में बच्चों को MMR वैक्सीन देने की बात कही गई है. इनमें दावा किया गया है कि MMR वैक्सीन से बच्चों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाया जा सकता है. इससे पहले कोरोना वायरस की पहली लहर के दौरान भी MMR वैक्सीन देने की बात की गई थी. उस समय MMR वैक्सीन प्रभावी साबित नहीं हुई थी. इस बारे में जानकारों का कहना है कि MMR वैक्सीन केवल बच्चों को दिया जाता है. इन टीकों को बच्चों के लिए बनाया जाता है. इसके लिए MMR वैक्सीन वयस्कों के लिए कारगर साबित नहीं हो सकी थी, लेकिन बच्चों के लिए यह प्रभावी हो सकती है. इस बात की प्रमाणिकता रिसर्च गेट पर छपी एक शोध से भी होती है. इस शोध में MMR वैक्सीन पर विस्तार से चर्चा की गई है. साथ ही कई शोधों को भी प्रस्तुत किया गया है, जिससे साबित होता है कि MMR का टीका बच्चों को संक्रमण से बचा सकता है. MMR वैक्सीन यानी मीजल्स, मम्प्स और रूबेला का टीका-यह टीका बच्चों को इन रोगों से बचाव के लिए दिया जाता है. इसकी शुरुआत 1971 में हुई थी. 1971 से 1978 तक केवल एक टीका दिया जाता था. इसके बाद दो टीके दिया जाने लगे.

रिसर्च गेट पर छपी शोध में 40 से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना से बचाव के लिए एक और 40 से कम उम्र के लोगों को दो टीके देने की बात की गई है. MMR का टीका गंभीर बीमारी और COVID-19 में सुरक्षा प्रदान कर सकता है. इस शोध की मानें तो साल 2019 में हॉन्ग कॉन्ग में सभी वयस्कों को मुफ्त में MMR का टीका दिया गया. यह योजना साल 2020 में भी जारी रखा गया था. इसके चलते केवल 4 लोगों की मौत कोरोना से हुई. जबकि, हॉन्ग कॉन्ग कोरोना के केंद्र स्थल वुहान से महज 900 किलोमीटर दूर है. इस शोध में यह भी बताया गया है कि सात सप्ताह की रिपोर्ट में 3 मई, 2020 तक कोरोना से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. वहीं, जर्नल आफ माइक्रोबायोलॉजी में फरवरी 2021 में प्रकाशित डेटा एनालिसिस में माना गया है कि जिन यूरोपियन देशों में एमएमआर का टीका बच्चों और किशोरों को लगा उन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हुआ. अगर हुआ भी तो बेहद हल्का. इंडियन इकेडमी आफ पीड्रियाट्रिक्स (आइएपी) की गाइडलाइन में बच्चों के अलावा 10 से 18 वर्ष साल तक के आयुवर्ग में एमएमआर का टीका है. इसके लिए विशेषज्ञ बच्चों को MMR का टीका देने की सलाह दे रहे हैं.
वैधानिक चेतावनी: इस स्टोरी के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं. इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें. बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

 

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