कम मतदान ने उड़ाए होश, वोटर की उदासीनता ने खड़े कर दिए कई सवाल

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ABC News: ढाई साल के अंदर गोविंदनगर विधानसभा की जनता के सामने एक बार फिर से सभी राजनीतिक दल अपने वादों-इरादों के साथ खड़े थे लेकिन जब लोकतंत्र के महापर्व पर मतदाताओं के हाथ में निर्णायक ताकत आयी तो उदासीनता की ऐसी बयार बही, जिसने न केवल सभी अनुमानों को ध्वस्त कर दिया बल्कि प्रत्याशियों के चेहरों की हवाइयां भी उड़ा दीं. कम मतदान से बिगड़े समीकरण में उन वजहों को भी तलाशा जा रहा है, जिसमें वोटर अपने घर से निकलकर मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे. बहरहाल, अब सबकी निगाहें 24 अक्टूबर पर टिक गई है. कम वोटिंग की वजह से माना जा रहा है कि दोपहर 12 से एक बजे तक यह पता चल जाएगा कि कम वोटिंग के बावजूद मतदाताओं ने किस प्रत्याशी और राजनीतिक दल पर अपना भरोसा जताया है.

गोविंदनगर विधानसभा उपचुनावों को लेकर सुबह से शाम ​तक जिस तरह से मतदाता उदासीन रहे, उसमें जहां प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो दूसरी तरह यह भी बड़ा मुद्दा बन गया कि आखिरकार मतदाता लोकतंत्र के महापर्व पर वोटिंग जैसा अधिकार का उपयोग क्यों करने से कतराता रहा. वैसे यह सवाल पूरी विधानसभा में मतदान केंद्रों से 200 मीटर की दूरी पर लगे बस्तों में भी उभरता रहा.

तीन दिन छुट्टी और दीपावली की सफाई क्या बनी वजह
कम वोटिंग को लेकर यह चर्चाएं तेजी से चल रही हैं कि तीन दिन की छुट्टी की वजह से ऐसा माहौल बना कि तकरीबन एक तिहाई मतदाता ही अपने घरों से वोट डालने बाहर निकला. सियासी गलियारों से लेकर गली, मोहल्लों और चौराहों की चुनावी चर्चा में कई लोग यह कहते हुए पाए गए कि शनिवार, रविवार और सोमवार की छुट्टी की वजह से अधिकतर लोग अपने घरों में दीपावली की तैयारियों में जुटे रहे. इसी वजह से अधिकतर मतदाता अपने घरों में ही बैठे रहे.

सरकार से नाराजगी को वजह बता रहा विपक्ष
कम वोटिंग को लेकर विपक्ष ने सीधे सरकार की विफलता से जोड़ा. गोविंदनगर, बर्रा, शास्त्रीनगर से लेकर रावतपुर जैसे कई मतदान केंद्रों के बाहर बने बस्तों में बैठे विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से जब यह सवाल किया गया, तो सपा, कांग्रेस और बसपा के प्रतिनिधियों कम वोटिंग को सीधे सरकार की विफलता से जोड़ा. विपक्ष के नेताओं का कहना था कि भाजपा सरकार ने कोई काम नहीं किया. यही वजह है कि जनता उपचुनाव में उन पर भरोसा नहीं जता रही और वोट के लिए नहीं निकल रही. इन विपक्षी नेताओं ने अपनी-अपनी जीत के दावों के साथ आंकड़ों को भी गिनाया.

भाजपा की फुलप्रूफ तैयारियों को लगा बड़ा झटका
वैसे उपचुनाव में हुए कम मतदान से भाजपा की फुलप्रूफ तैयारियों को बड़ा झटका दिया है. गौरतलब हो कि उपचुनावों की तैयारी बैठक में प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने जब बूथ प्रभारियों से लेकर बूथ अध्यक्षों के साथ बैठक की थी तब उन्होंने चुनाव और उपचुनाव का अंतर समझाया था. इसके अलावा पिछले तीन चुनावों का अध्ययन करने को भी कहा गया था. भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रतनलालनगर में जनसभा करने आए. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल नंदी लगातार यहां पर डेरा जमाए रहे. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, सांसद से लेकर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को एक-एक बूथ की जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें बूथ प्रवासी बनाया गया. मतदाताओं के घर-घर दस्तक देने को भी कहा गया. पन्ना प्रमुख भी पूरी तरह मुस्तैद रहे. दोपहर के बाद बूथ प्रवासियों के मतदाताओं के फोन पर मतदाताओं से वोटिंग करने को भी पूछा. इन सारी कवायदों के बावजूद जिस तरह से तृतीय श्रेणी के आसपास मतदान रहा, उसने राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया है.

24 को जीत के अंतर पर लगी निगाहें
कम वोटिंग के साथ ही अब 24 अक्टूबर पर सभी की निगाहें लग गई हैं. माना जा रहा है कि जिस तरह से वोटिंग हुई है, उसके बाद दोपहर 12 से एक बजे तक चुनावी तस्वीर साफ हो जाएगी. हालांकि, प्रत्याशियों के बीच जीत और हार का अंतर कितना होगा, यह देखना दिलचस्प हो गया है.


रिपोर्ट: सुनील तिवारी

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