केस्को कर्मचारी को 36 साल बाद मिली जीत, अब विभाग को चुकाना होगा 15 लाख

ABC NEWS: केस्को को श्रम न्यायालय से बड़ा झटका लगा है. केस्को से सेवानिवृत्त कर्मचारी ओंकार सिंह गंगवार ने अपना हक पाने के लिए 36 साल तक उच्च न्यायालय से लेकर श्रम न्यायालय तक चली लड़ाई जीत ली है. न्यायालय ने कर्मचारी के हक में फैसला देते हुए केस्को अधिकारियों को 15 लाख 15 हजार 705 रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं.

श्रमिक प्रतिनिधि व अधिवक्ता दिनेश सिंह भोले ने बताया कि मकड़ीखेड़ा निवासी ओंकार सिंह ने चार मार्च 1977 को बिजलीघर परेड में ड्राफ्टमैन के पद पर नियुक्ति पाई थी. 1982 में ओंकार का तबादला रीवर साइड पावर हाउस में हो गया. रीवर साइट पावर हाउस 1991 में बंद होने व शासन द्वारा कर्मचारी का पद समाप्त करने के बाद भी ओंकार सिंह कम्प्यूटर संगणक पद पर सेवायें देते रहे. लेकिन वेतन ड्राफ्टमैन पद का ही मिलता रहा. कर्मचारी ओंकार सिंह ने वर्ष 1991 में कोर्ट का सहारा लिया. हाईकोर्ट में करीब 13 साल तक केस पर स्टे रहा. केस से स्टे हटने के बाद प्रकरण श्रमायुक्त कार्यालय में पहुंचा. सहायक श्रमायुक्त डा. नीकी नैनसी ने केस की सुनवाई के दौरान वादी व प्रतिवादी का पक्ष सुना. सहायक श्रमायुक्त ने तीन दिसंबर को केस्को को आदेश जारी कर सेवानिवृत्त कर्मचारी को 15 लाख 15 हजार रुपये की राशि का भुगतान करने को कहा है. अब केस्को ओंकार को 1991 से लेकर 2005 तक के देय पावकों का भुगतान करेगा.

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