Kedarnath Dham: 17 मई को सुबह पांच बजे खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

ABC News: केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई सोमवार को सुबह पांच बजे खुल जाएंगे. 14 मई को केदार बाबा की चल विग्रह पंचमुखी डोली ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से केदारनाथ धाम को प्रस्थान करेगी. गुरुवार को शिवरात्रि पर पंचाग गणना के बाद विधि-विधानपूर्वक पंचकेदार गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में कपाट खुलने की तय की गई.

द्वादश ज्योर्तिलिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की महाशिवरात्रि पर्व पर पंचगद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में तय हुई. इसके लिए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड ने इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई. ओंकारेश्वर मंदिर को छह क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया है. यमुनोत्री, गंगोगी व बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि पहले ही तय की जा चुकी है. यमुनोत्री व गंगोत्री के कपाट अक्षय तृतीय पर 14 मई को और बदरीनाथ के कपाट 18 मई को खोले जाएंगे.
बता दें कि बीते साल नवंबर में केदारनाथ धाम के कपाट परंपरा के अनुसार और वैदिक उच्चारण के साथ 6 माह के लिए बंद कर दिए गए थे. बारिश और बर्फबारी के बीच विश्व प्रसिद्ध 11वें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट भैया दूज के अवसर पर बंद किए गए थे.

कपाट बंद होने से पहले भगवान को ऊन का लबादा पहनाया गया. इस ऊन के लबादे पर घी लगाया जाता है. यहां पर भक्त और भगवान की आत्मीयता और लगाव के दर्शन होते हैं. प्रभु को ठंड न लगे, इस धारणा, आत्मीयता, स्नेह के कारण भगवान को यह ऊन का लबादा जिसे घृत कम्बल कहते हैं, पहनाया जाता है. इसे भारत के अंतिम गांव माणा की कन्या बुनकर भगवान को देती हैं. भगवान के प्रति सम्मान यह वस्त्र उपहार और आदर के रूप में देखा जाता है.मान्यता है कि भगवान के शीतकाल में कपाट बंद होने पर देवता, भगवान का दर्शन-अर्चन करने आते हैं. जिस तरह कपाट खुलने पर मानव भगवान का दर्शन-अर्चन करते हैं.बीते यात्रा वर्ष में 1 लाख 35 हजार 23 श्रद्धालुओं ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किए.

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