शिवालिक के जंगल में लौटी खुशियां, 11 साल बाद दिखा दुर्लभ गिद्धों का पूरा कुनबा

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ABC News: शिवालिक के जंगलों में 11 वर्ष बाद खुशियां लौट आई हैं. यहां विलुप्त हो चुके दुर्लभ गिद्धों का नया कुनबा जंगल में आ गया है. पश्चिम उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में मात्र शिवालिक वनक्षेत्र में ही दो गिद्ध बचे थे, जिन्हें वर्ष 2011 में अंतिम बार देखा गया था. इसके बाद पर्यावरण के स्वच्छतादूत कहे जाने वाले गिद्ध यहां से गायब हो गए थे. 11 वर्ष तक शिवालिक में एक भी गिद्ध नहीं दिखा. वन्यजीव गणना में भी गिद्ध लगातार विलुप्त पाए गए. अब शिवालिक में दुर्लभ गिद्धों को उड़ान भरते देखा जा रहा है. वन्यजीव गणना में भी गिद्धों की गिनती कराई जा रही है. यहां पर प्रारंभिक नतीजे उत्साहित करने वाले हैं. अब तक मिले चिन्हों के अनुसार कुनबे में 50 से अधिक गिद्ध होने की संभावना है.

शिवालिक वन क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमी 11 वर्ष तक गिद्धों के दीदार को तरसते रहे. वर्ष 2011 में शिवालिक वन क्षेत्र के करौंदी बीट नंबर दो के कच्छ खारा 2 ए में दो गिद्धों को अंतिम बार देखा गया था. 2011 में हुई वन्यजीव गणना में दोनों गिद्धों के गायब होने की पुष्टि हुई. इसके साथ ही गिद्धों के शिवालिक से विलुप्त होने पर मुहर लग गई. इसे शासन ने गंभीरता से लेकर दोनों गिद्धों को तलाश कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली. 2022 में शिवालिक के बादशाहीबाग इलाके में दुर्लभ गिद्धों का पूरा परिवार एक साथ दिखाई देने से वन विभाग उत्साहित है. यह गिद्ध आकाश में उड़ते हुए तथा मृत पशुओं का मांस खाते हुए देखे जा रहे हैं. अब वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया शिवालिक में पगमार्क तकनीक के जरिए गिद्धों की कुल संख्या का पता लगा रहा है. इस क्षेत्र में गिद्धों के कुनबे में वृद्धि के क्या-क्या कारक हैं, किन वजहों से इनका इस क्षेत्र में आगमन इतने लंबे अंतराल के बाद फिर हुआ है, वन विभाग इसके बारे में भी अध्ययन करने में जुटा है. डीएफओ शिवालिक श्वेता सेन के अनुसार शिवालिक में देखा जा रहा गिद्ध पूरे हिमालय क्षेत्र में पाया जाने वाला सबसे बड़ा और दुर्लभ पक्षी ‘हिमालयन ग्रिफन गिद्ध’ है. यह तो पहली बार शिवालिक में देखा गया है. हिमालयन ग्रिफन गिद्ध बड़े आकार का फीके पीले रंग का होता है, जो लगभग सम्पूर्ण हिमालयीय क्षेत्र में पाया जाता है. यह काबुल से लेकर तिब्बत और भूटान तक पाए जाते हैं. इसके पंख काफी बड़े होते हैं. इसकी पूंछ छोटी होती है. इसकी गर्दन सफेद पीले रंग की होती है. ये हिमालय में 1200 से 5000 मीटर तक की ऊंचाई पर देखे जा सकते हैं. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में इस गिद्ध को ‘संकटापन्न’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. इस पक्षी को शिवालिक अभयारण्य में देखा जाना एक बेहद दुर्लभ घटनाक्रम है. शिवालिक वन क्षेत्र से लगे हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के जंगलों तक गिद्ध उड़ान भर रहे हैं. यहां पिछले दिनों नाहन के समीप बालासुंदरी गोसदन के पास काफी संख्या में गिद्धों को पेड़ों पर बैठा हुआ देखा गया. यह बताया जा रहा है कि शिवालिक में दिख रहे गिद्ध भी इसी कुनबे का हिस्सा हैं. डीएफओ, शिवालिक श्वेता सेन ने कहा कि शिवालिक के जंगल में हिमालयन गिद्धों का कुनबा आना ऐतिहासिक उपलब्धि है. शिवालिक वन क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हिमालयन गिद्धों को लेकर वन विभाग उत्साहित है, राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली वन्यजीव गणना में आंकड़े सामने आते ही पता चलेगा कि शिवालिक में कितने गिद्ध हैं. गिद्ध संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि गिद्धों की संख्या बढाई जा सके. वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्य कर रहे रिटायर्ड डीएफओ जीएस कुशारिया बताते हैं कि गिद्धों के विलुप्त होने के कई कारण हैं. इसमें इलेक्ट्रो रेडिएशन, मोबाइल टॉवरों की बढ़ती संख्या, पेस्टीसाइड्स का अधिक प्रयोग, फाइकश प्रजाति तथा सूखे बड़े पेड़ों की संख्या में कमी, गैर-स्टेरॉयडल सूजनरोधी दवाओं का जानवरों में अधिक प्रयोग, कीटनाशक का अधिक प्रयोग वजह है. यह रसायन गिद्धों के शरीर में खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवेश करते हैं, जहां यह एस्ट्रोजन हार्मोन की गतिविधि को प्रभावित कर गिद्ध की प्रजनन प्रक्रिया कमजोर कर देते हैं.

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