मथुरा में दाऊजी के हुरंगा में खूब उड़ा गुलाल, हुरिया‍रिनाें ने हुरियारों पर बरसाए कोड़े

ABC News: ब्रज में आठ दिन से चल रहा होली उत्सव मंगलवार को दाऊजी के हुरंगा के साथ संपन्न हो गया. आज के दिन दाऊजी में हुरंगा की अनूठी परंपरा निभाई गई. इस मौके पर हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने होली खेली. महिलाओं ने कोड़े मारे और पुरुषों ने महिलाओं पर रंग फेंका. ब्रज की होली भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित है, वहीं, दाऊजी का हुरंगा उनके बड़े भाई बलदेव जी पर केंद्रित है. बरसाना, नंदगांव, मथुरा, गोकुल की होली के बाद मंगलवार को दाऊजी मंदिर परिसर में हुरंगा हुआ.

लहंगा फरिया पहने हुरिया‍रिनाें ने हास-परिहास करते हुरियारों पर प्यार भरे कोड़े बरसाए. हुरियारिनों और हुरियारों पर रंगाें की बारिश हुई. अबीर गुलाल के बादल छा गए. हुरंगा को लेकर हजारों की संख्या में श्रदालु दाऊजी मंदिर पहुंचे, जिससे मंदिर परिसर में पैर रखने के लिए जगह नहीं बची. हुरंगा के दौरान मंदिर की छत, छज्जों से गुलाल उडाया गया, जिससे मंदिर परिसर पर सतरंगी इंद्रधनुष बन गया.

हुरंगा में पुरुष गोप समूह को महिलाएं गोपिका स्वरूप द्वारा प्रेम से भीगे पोतने (कोड़ों) की मार नंगे बदन पर खाते हैं. नंगे बदन पर कोड़ों की मार देखने के लिए हजारों देशी-विदेशी श्रद्धालु उमड़े. दाऊजी के हुरंगा को ब्रज की होली का मुकुट मणि माना जाता है. हुरंगा खेलने के लिए ब्रज की गोपिकाएं परंपरागत लहंगा-फरिया व आभूषण पहन कर झुंड में मंदिर के विभिन्न द्वारों से होली गीत गाते हुए आईं. मंच पर श्रीकृष्ण, बलराम सखाओं के साथ अबीर गुलाल उड़े. रसिया की गूंज के बीच श्रद्धालु भी झूमते रहे. सेवायतों ने बताया कि हुरंगा के अंत मे दो हुरियारिन झंडा छीनने का प्रयास करती हैं. पुरुष इसे बचाने का प्रयास करेंगे, लेकिन अंत में हुरियारिन झंडा छीनने में सफल हो जाती हैं. इसके साथ ही ह‍ुरंगा संपन्‍न हो जाता है.

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