सरकार देश के 15-20 उद्योगपतियों के लिए ही कर रही काम: राहुल गांधी

  • गरीबों से उसे कोई मतलब नही
  • छोटे व्यापारी परेशान है
  • किसानों की सबसे ज्यादा दुर्दशा

ABC NEWS: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक बार फिर केंद्र सरकार को चंद पूंजीपतियों के लिए काम करने वाली सरकार बताते हुए वादा किया कि यदि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आती है तो सबसे पहले किसानों के दो लाख रुपये तक के ऋण माफ करेगी. गांधी ने आज यहां अपने गठबंधन सहयोगी झामुमो के प्रत्याशी केतुबुद्दीन शेख के समर्थन में आयोजित जनसभा में यह बात कही. इन चुनावों में पहली बार उनके साथ मंच पर झामुमो  कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन भी उपस्थित थे.

राहुल गांधी ने भाजपा नीत केन्द्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार देश के सिर्फ चुनिंदा 15-20 पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है. साथ ही उन्होंने कांग्रेस-नीत गठबंधन की सरकार बनने पर आदिवासियों के जल, जंगल जमीन की रक्षा करने की बात भी कही. झारखंड विधानसभा चुनावों में चौथे और पांचवें चरण के लिए आयोजित चुनावी रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया, केंद्र सरकार का लक्ष्य गरीबों का पैसा लेकर अंबानी और अडाणी की जेब में डालना है. उन्होंने आरोप लगाया कि आज केन्द्र में जो सरकार काम कर रही है वह वास्तव पूंजीपतियों के हित में काम करने वाली सरकार है. वह झारखंड के आदिवासियों से जमीन छीनकर इन उद्योगपतियों को देने का काम कर रही है लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी.

राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार ने टाटा से जमीन वापस लेकर आदिवासियों को लौटा दी. उन्होंने कहा कि ऐसा हमने इसलिए किया क्योंकि टाटा जैसी बड़ी कंपनी ने पांच वर्ष से अधिक समय से आदिवासियों की जमीन लेकर वहां उद्योग नहीं लगाया था. हमने कानून बनाया था कि जो भी उद्योगपति पांच वर्ष तक भी भूमि का उपयोग नहीं करेगा उससे जमीन वापस ले ली जायेगी और किसानों और आदिवासियों को लौटा दी जायेगी.

उन्होंने एक बार फिर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने नोटबंदी कर दी और फिर जीएसटी लागू कर दी जिससे तमाम उद्योग बंद हो गये. छोटे व्यापारी और गरीब बर्बाद हो गये. लोगों के रोजगार छीन गए। गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ में किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,500 रुपया देने से मना कर दिया लेकिन उनकी सरकार ने ऐसा कर दिखाया. जबकि झारखंड में अभी भी किसानों को 1,300 रुपये प्रति क्विंटल ही धान का मूल्य मिल रहा है.


नेहा तिवारी                                                                       यह भी पढ़ें…..

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