कानपुर में साबरमती व गोमती की तर्ज पर बनेगा गंगा रिवर फ्रंट, प्लान की रूपरेखा तैयार

ABC NEWS: साबरती और गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर कानपुर में गंगा रिवर फ्रंट बनाया जाएगा. इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है. गुजरात कैडर के आईएएस केशव वर्मा द्वारा सितंबर 2020 में किए गए डिजिटल प्रेजेंटेशन पर शासन ने आखिरकार सहमति जता दी है.

देश में कानपुर पहला शहर होगा जो गंगा की सेहत सुधारने के लिए अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान तैयार करेगा. इस प्लान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है. जिसमें बताया गया है कि नदी के किनारे 16 किलोमीटर के दायरे को खूबसूरत बनाया जाएगा. प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन दीपक कुमार ने आईआईटी की मदद लेने का निर्देश दिया है.

केशव शर्मा ने इस संबंध में कानपुर, लखनऊ और गुजरात के साथ ही राजस्थान की नदियों को लेकर स्टडी रिपोर्ट दी है. इसमें बताया गया है कि किस तरह साबरमती और गोमती रिवर फ्रंट के आसपास की तस्वीर बदल गई. लाखों लोगों को इससे न सिर्फ रोजगार मिला है बल्कि अब यह पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुका है. आय के संसाधनों में वृद्धि के साथ ही विकास प्राधिकरणों को इसके जरिए बहुत लाभ पहुंचेगा. कानपुरवासियों को इस परियोजना का बहुत लाभ मिलेगा.

सात वर्ष पहले बने रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में होगा बदलाव

केडीए ने गंगा रिवर फ्रंट की योजना सात वर्ष पहले बनाई थी. इस पर 300 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव किया गया था. गंगा के किनारे 1100 एकड़ जमीन भी चिह्नित करके मार्जिनिल बांध बनाने का प्रस्ताव किया गया था. जिस पर स्वीकृति के लिए आज तक जल संसाधन मंत्रालय (अब जलशक्ति मंत्रालय) के पास फाइल लंबित है. देर होने के कारण केडीए को इस प्रस्ताव से पीछे हटना पड़ा था। अब पुराने प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाएगा.

द्रव्यवती के पुनरुद्धार मॉडल पर सुधरेगी पांडु की सेहत

जयपुर की द्रव्यवती नदी का जिस तरह पुनरुद्धार किया गया था उसी मॉडल पर यहां की गंगा की सहायक नदियों (पांडु व नून नदी आदि) को पुराने स्वरूप में लाने की कवायद होगी. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स नई दिल्ली और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा द्वारा तैयार की गई रूपरेखा का विमोचन चार नवंबर 2020 को जलशक्ति मंत्रालय द्वारा विमोचन किया गया था. अब पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा.

जितना पानी गंगा से लेंगे उतना करेंगे वापस

इस प्लान को तैयार करने में जुटे विशेषज्ञों की रिपोर्ट है कि जितना पानी गंगा से लिया जाएगा उतना अब वापस भी किया जाएगा. मसलन, गंगा बैराज से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए शहर में पेयजल की व्यवस्था तो की जा रही है लेकिन वापसी नहीं हो पा रही. अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान में यह व्यवस्था की जाएगी विभिन्न श्रोतों से गंगा में उतना ही पानी वापस किया किया जाए.

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