सावन पूर्णिमा पर स्नान-दान के साथ करें ये काम, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

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ABC NEWS: पूर्णिमा तिथि को हिंदू पंचांग के अनुसार माह का आखिरी दिन माना जाता है. पूर्णिमा के बाद नए माह की शुरुआत होती है. इस तरह से पूरे साल में कुल 12 पूर्णिमा तिथि पड़ती है, जिसका विशेष महत्व होता है. पूर्णिमा के दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ और व्रत किए जाते हैं. लेकिन सावन माह में पड़ने वाली पूर्णिमा का महत्व काफी बढ़ जाता है, इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से सावन पूर्णिमा(Sawan Purnima) को खास माना जाता है. इस बार सावन पूर्णिमा गुरुवार 11 अगस्त 2022 को है. सावन पूर्णिमा के दिन कुछ महत्वपूर्ण कार्य करने का विधान है, जिससे न सिर्फ देवी-देवता बल्कि पूर्वज भी प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. दिल्ली के आचार्य गुरमीत सिंह जी से जानते हैं सावन पूर्णिमा के दिन किन कार्यों को करने से भगवान और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

सावन पूर्णिमा के दिन जरूर करें ये कार्य
भगवान को अर्पित करें रक्षासूत्र
सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, लेकिन सबसे पहले इस दिन भगवान को रक्षासूक्ष अर्पित करना चाहिए. आप भगवान विष्णु, भगवान शिव, हनुमान जी, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को रक्षासूत्र चढ़ाएं. इसके बाद आप स्वयं यह रक्षासूत्र अपनी कलाई पर बांधे. इसके उपरांत भाई को राखी बांधे. इससे भगवान का आशीर्वाद आप पर सदैव बना रहेगा और आप हर तरह के संकंट से मुक्त रहेंगे.

दान से दूर होगा चंद्रदोष
सावन पूर्णिमा के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें. इस दिन ब्राह्मण भोज भी कराना शुभ होता है. कहा जाता है कि सावन पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होते हैं. यही कारण है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा से चंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को चंद्रदोष से मुक्ति मिलती है.

सावन पूर्णिमा पर नया जनेऊ धारण करने का महत्व
सावन पूर्णिमा का दिन ब्राह्मणों के लिए भी खास होता है. इस दिन ब्राह्मण पुराने जनेऊ का त्याग कर नया जनेऊ धारण करते हैं. नया जनेऊ धारण करने के लिए सावन पूर्णिमा का दिन सबसे उत्तम माना जाता है. सावन पूर्णिमा के दिन मन, वचन और कर्म से पवित्रता का संकल्प लेकर नया जनेऊ धारण करने पर भगवान और पूर्वज दोनों प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.

इस मंत्र से मिलेगा महादेव और पितृ का आशीर्वाद
सावन माह भगवान शिव का प्रिय माह होता है और इस पूरे माह शिवजी की पूजा की जाती है. सावन के अंतिम दिन यानी सावन पूर्णिमा पर महादेव को प्रसन्न करने के लिए आप महादेव की पूजा-अर्चना करें और पूजा में बीज मंत्र “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात” का जाप जरूर करें. इस मंत्र का जाप करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है.

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