डेंगू व वायरल से मौतों पर CM योगी का एक्शन, फीरोजाबाद की CMO को हटाया गया

ABC News: पश्चिम उत्तर प्रदेश में डेंगू और वायरल बुखार के कारण स्थिति बेकाबू होती जा रही है. खासकर फीरोजाबाद में हालात बेहद नाजुक बन गए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. उनके निर्देश पर फीरोजाबाद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. नीता कुलश्रेष्ठ को हटा दिया गया है. फीरोजाबाद में डेंगू और वायरल फीवर को काबू करने में नाकाम होने के कारण उन्हें हटाया गया है. हापुड़ के एसीएमओ डा. दिनेश कुमार प्रेमी को नया मुख्य चिकित्सा अधिकारी बनाया गया है. नीता कुलश्रेष्ठ को अलीगढ़ में वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर भेजा गया है.

फीरोजाबाद में डेंगू और वायरल फीवर का कितना प्रकोप है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि अब तक वहां 53 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सिर्फ राजकीय मेडिकल कालेज में ही 60 से अधिक बच्चे भर्ती हैं. स्थिति इतनी गंभीर न हुई होती यदि शुरू से ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया होता. सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने बुधवार को अधिकारियों के साथ हुई उच्‍च स्‍तरीय बैठक में फीरोजाबाद में स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वहां की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखे. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम जिले में कैम्प करे और स्थानीय जरूरत के अनुसार, चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित कराएं. लोगों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए. बता दें कि फीरोजाबाद में डेंगू और वायरल फीवर के कारण अब तक 52 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें ज्यादातर बच्चे हैं. बच्चों के ब्लड सैंपल लखनऊ भेजे गए हैं. बीमारी की वजह से आठवीं तक के स्कूल अब छह सितंबर को खोलने का निर्णय लिया गया है. डीएम चंद्र विजय सिंह के अनुसार, 46 बच्चों के एंटीजन टेस्ट से डेंगू की पुष्टि हुई है. शहर के अन्य क्षेत्रों में मौतों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है. एलाइजा टेस्ट शुरू हो गया है. वहीं मथुरा जिले में बुखार का कहर थमा नहीं है. जिले में मृतकों की संख्या 13 हो गई है. 12 रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है. इससे डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या 90 हो गई है. फीरोजाबाद में सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार और डाक्टरों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में नहीं आ रहे हैं. सीएम के निर्देश के बाद गांवों में एम्बुलेंस पहुंचकर रोगियों को ला रही है, वहीं अस्पताल में लगने वाली कतार बढ़ती जा रही है. अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं और रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है. ट्रामा सेंटर में संसाधन कम पड़ रहे हैं. स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है. जितने मरीज ठीक होकर घर लौटते हैं, उससे ज्यादा भर्ती होने आ रहे हैं.

 

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