फर्रुखाबाद में बौद्ध अनुयायियों ने धार्मिक स्थल के हिस्से को किया क्षतिग्रस्त: तनाव,फोर्स तैनात

ABC NEWS: फर्रुखाबाद केसंकिसा में चल रहे दो दिवसीय बौद्ध महोत्सव में बुधवार सुबह बौद्ध अनुयायी परंपरागत धम्मयात्रा लेकर धार्मिक स्थल पर पहुंचे. इस दौरान सनातन धर्मी भी कुछ दूरी पर हर साल की तरह डटे थे. तभी दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी शुरू हो गई. उसी दौरान कुछ बौद्ध अनुयायी धार्मिकस्थल पर चढ़ गये और वहां स्थित बिसारी देवी मंदिर का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त कर वहां लगे भगवा ध्वज को हटा दिया और वहां पर पंचशील ध्वज फहरा दिया. इस पर सनातनधर्मियों ने विरोध किया तो विवाद होने लगा. देखते ही देखते वहां पथराव होने लगा. इससे अफरा-तफरी मच गई. पथराव में कई लोग चुटहिल हो गए. आनन-फानन कई थानों का पुलिस फोर्स पहुंचा और लोगों को समझाने के प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी.

हालांकि इस दौरान पुलिस ने विवादित जगह पर लगाया गया पंचशील ध्वज हटा दिया है. विवाद की खबर क्षेत्र में फैली तो वहां बड़ी तादात में सनातनधर्मी जमा हो गए और उन्होंने विवादित स्थल को चारों ओर से घेर लिया. इससे बौद्ध परिसर में मौजूद अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य समेत अन्य बौद्ध अनुयाई धार्मिक स्थल में ही फंस गए. उपद्रव की जानकारी होते ही कायमगंज क्षेत्राधिकारी सोहराब आलम, उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार भी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कोई सफलता हासिल नहीं हुई. दोनों से माहौल तनाव पूर्ण है. बिसारी देवी सेवा समिति की ओर से भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अतुल दीक्षित ने कहा कि जब तक क्षतिग्रस्त मंदिर बनवाकर वहां भगवा ध्वज लगाकर यथास्थिति कायम की जाए. तभी वह लोग हटेंगे.

यह है विवाद: संकिसा स्थित धार्मिक स्थल पर बौद्ध अनुयायियों का दावा है कि यह बौद्ध स्तूप है. यहीं पर भगवान बुद्ध का स्वर्गावतरण हुआ था. उधर सनातनधर्मियों का दावा है कि धार्मिक स्थल पर मां बिसारी देवी का प्राचीन मंदिर है. यहां हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है. यह सनातनधर्मियों की जगह है. इस धार्मिक स्थल पर दावे को लेकर करीब 40 वर्ष बौद्ध व सनातनधर्मियों के बीच न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है.

पहले भी हो चुकी है भिड़ंत: बौद्ध व सनातनधर्मियों के बीच करीब आठ वर्ष पहले भी भिड़ंत हो चुकी है. दोनों पक्षों में तब भी जमकर पथराव हुआ था. इसमें कई लोग घायल हुए थे. पुलिस ने तब मामला रफा-दफा कर दिया था. इसी वजह से प्रति वर्ष बौद्ध महोत्सव की वजह से वहां मजिस्ट्रेट की अगुवाई में भारी पुलिस फोर्स लगाया जाता है. इस बार पुलिस अधिकारियों पूरी तरह से लापरवाही बरती. केवल सनातनधर्मी और बौद्ध धर्मियों के बीच एक बैठक कर विवाद न करने की हिदायत दी गई. कुछ लोगों को नोटिस भी जारी किए गए थे. बौद्ध अनुयायियों को महज 200 लोगों की उपस्थिति में कार्यक्रम करने को कहा गया था, लेकिन मंगलवार रात को हजारों की तादात में बौद्ध अनुयायी जुट गए. पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी.

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