आखिर रामपुर और आजमगढ़ में चुनाव प्रचार से अखिलेश ने क्यों बनाई दूरी, जानें क्या है मामला

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ABC News: रामपुर और आजमगढ़ में हो रहे उपचुनाव का कल यानी मंगलवार को प्रचार का आखिरी दिन है. भाजपा की तरफ से स्टार प्रचारक सीएम योगी आजमगढ़ जा चुके हैं. कल रामपुर भी जाएंगे. डिप्टी सीएम केशव मौर्य भी दोनों स्थानों पर सभाएं कर चुके हैं.कई मंत्रियों ने तो वहीं पर डेरा डाल दिया है.लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव अभी तक दोनों में से किसी जगह नहीं पहुंचे हैं. आजमगढ़ में तो अब सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव के प्रचार से दूर रहने को लेकर ही हो रही है.

आजमगढ़ सीट पिछली बार अखिलेश ने ही जीती थी. विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अखिलेश ने लोकसभा से इस्तीफा दिया तो पहले आजमगढ़ आए और लोगों से राय भी ली थी. इसके बाद भी आजमगढ़ में प्रचार के लिए नहीं आए हैं. इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रही हैं. एक तरफ कहा जा रहा है कि सपा प्रमुख दोनों सीटों को जीतने को लेकर आश्वस्त हैं तो दूसरी तरफ इसे उनके ओवर कॉन्फिडेट से भी जोड़ा जा रहा है. आजमगढ़ सीट की बात करें तो पिछले दो लोकसभा चुनावों (2014 और 2019) में भाजपा की प्रचंड लहर के बाद भी सपा ने यह सीट जीती थी. 2014 में मुलायम सिंह और 2019 में अखिलेश यादव इस सीट से जीते थे. अखिलेश के चुनाव जीतने को लेकर आश्वस्त के पीछे के कई कारण भी गिनाए जा रहे हैं. एक कारण यहां के पूर्व सांसद रमाकांत यादव का सपा में आना भी माना जा रहा है. रमाकांत यादव बीजेपी में रहने के दौरान सपा को कड़ी टक्कर देते रहे हैं. 2014 में भी रमाकांत ने मुलायम सिंह यादव को टक्कर दी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में रमाकांत कांग्रेस में चले गए थे. इसके बाद सपा में आ गए थे. इसके अलावा विधानसभा चुनाव में क्लीन स्वीप भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है. सपा गठबंधन ने पिछले विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी दस सीटें जीती हैं. आजम खां की नाराजगी दूर होना और उनका प्रचार के लिए उतरना भी अखिलेश के लिए राहत वाला है. कहा तो यह भी जा रहा है कि अखिलेश प्रचार में नहीं उतरकर एक तीर से दो निशाने भी मारने की कोशिश कर रहे हैं. अगर हारते हैं तो सीधा दोष उन पर नहीं जाएगा. और अगर बिना उनके प्रचार में गए ही जीतते हैं तो भाजपा पर हमला बोलने का बड़ा मौका मिल सकता है. अखिलेश के नहीं आने को लेकर सोमवार को केशव प्रसाद मौर्य ने भी निशाना साधा. प्रचार के लिए आजमगढ़ आए केशव ने कहा कि अखिलेश को पता चल गया है कि वो हार रहे हैं. इसलिए प्रचार से दूरी बना ली है. आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा की खाली सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए चल रहा प्रचार मंगलवार 21 जून की शाम को थम जाएगा. आजमगढ़ में त्रिकोणीय और रामपुर में सपा और भाजपा में सीधी टक्कर है. पुलिस प्रशासन ने सुरक्षित, स्वतंत्र व शांतिपूर्ण मतदान सम्पन्न करवाने के लिए इन दोनों जिलों से लगी दूसरे जिलों की सीमाओं पर चौकसी भी बढ़ा दी जाएगी. रामपुर की सीट पर सपा के मोहम्मद आजम खां और आजमगढ़ की सीट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में जीते थे. इस साल 2022 में हुए विधान सभा चुनाव में मोहम्मद आजम खां ने रामपुर से और अखिलेश यादव ने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव जीता था. उसके बाद इन दोनों नेताओं ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.  इस वजह से यह दोनों सीटें खाली चल रही थीं भाजपा ने आजमगढ़ से भोजपुरी फिल्म अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ को मैदान में उतारा है. वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में निरहुआ सपा प्रमुख अखिलेश यादव से हुए मुकाबले में हार गए थे. सपा ने इस सीट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव को उम्मीदवार बनाया है जबकि बसपा ने यहां से पूर्व विधायक और कारोबारी शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को प्रत्याशी घोषित किया है. जमाली ने इस बार हुए विधान सभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी आल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के टिकट पर चुनाव लड़ा था मगर वह हार गए. रामपुर से सपा उम्मीदवार असीम राजा पिछले चार दशकों से आजम खां के सहयोगी रहे हैं जबकि भाजपा ने यहां से घनश्याम लोधी को प्रत्याशी बनाया है. बसपा ने यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है. रामपुर में भाजपा ने प्रचार की कमान संसदीय कार्य व वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को सौंपी है. आजमगढ़ में प्रचार का जिम्मा कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को दिया गया है.

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