योगी सरकार के मरहम से मेरठ से 63 हिंदू बंगाली परिवार पहुंचे कानपुर देहात, कभी पाकिस्तान से हुए थे विस्थापित

ABC NEWS: नई जिंदगी और आशियाने की आस लेकर 63 हिंदू बंगाली परिवार सोमवार को कानपुर देहात के रसूलाबाद तीन बसों से पहुंच गए. मेरठ में 1984 से जब से मिल बंद हुई वह सड़क पर आ गए थे और मजदूरी व बाकी काम किसी तरह से जीवन यापन कर रहे थे. अब यहां अपना मकान व अपने खेत होंगे. सभी को कांशीराम कालोनी के कम्युनिटी हाल में रोका गया है.

1970 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से यहां विस्थापित हुए परिवारों को मेरठ में व कुछ को रसूलाबाद के भैंसाया के पास बसाया गया था. इनमें मेरठ के परिवारों को अब योगी सरकार ने यहां बसाने का फैसला किया और भैंसाया में उनके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली गई है. तीन बसों से सोमवार दोपहर को नायब तहसीलदार मनोज रावत हिंदू बंगाली परिवारों को लेकर पहुंचे तो तहसीलदार राजकुमार चौधरी व अधिशाषी अधिकारी दिनेश कुमार शुक्ला ने सभी का स्वागत किया. इसके बाद सभी परिवार के सदस्य बसों से अपने कपड़ें, राशन व बाकी सामग्री निकालकर हाल में पहुंचे और वहां पर बिस्तर लगाया व बाकी सामान को रखा. गर्मी के इस मौसम में इन परिवारों को कोई परेशानी ना हो इसके लिए तत्काल नए पंखे लगवाए जा रहे हैं. परिवारों को उनके मकान बनने तक यहां रहने की पूरी व्यवस्था की जा रही है. तहसीलदार राजकुमार चौधरी में बताया कि इन लोगों के यहां बैंकों में खाते खुलवाए जाएंगे. इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 1.20 लाख रुपये उनके खाते में स्थानांतरित किए जाएंगे. इसके बाद यह लोग अपने मकान बनाएंगे और मकान बनते ही अपने घरों में जाएंगे. इसके साथ ही इनके राशन की व्यवस्था के लिए इन्हें राशन कार्ड बना कर दे दिए जाएंगे और भी किसी प्रकार की परेशानी होने पर उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा.

सरकार से बेहद खुश हैं परिवार

सभी परिवार योगी सरकार से बेहद खुश हैं। उनका कहना था कि हमारी पीढ़ियां परेशान थीं लेकिन अब जाकर स्थायी ठिकाना मिलेगा. जमा पूंजी खर्च करने के बाद मेहनत मजदूरी करके किसी तरीके से अपने परिवार का भरण पोषण कर पा रहे थे. इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हम लोगों की सुनवाई कर ली जिससे एक नई जिंदगी मिली है.

क्या कहते हैं लोग

– इस सरकार ने गरीबों की सुनी है। हमारे बच्चे कभी इस अहसान को भूल नहीं पाएंगे. हम सड़क पर दर-दर भटकते लोगों को अब आवास और जीविकोपार्जन का साधन दे दिया है. अब आराम से जिंदगी काटेंगे। – दिलीप मंडल

– मेरठ में रहकर अपने परिवार का भरण पोषण मजदूरी करके करते थे. मिल बंद होने से काफी समस्याएं झेलीं. अब यहां खेती किसानी संग अन्य काम कर अच्छा जीवन गुजारेंगे. – रामप्रकाश

– मेरठ में रहकर अपने सात सदस्यीय परिवार का भरण पोषण पुताई का काम करके थे. उनके दो बच्चे बड़े भी हैं. वह उन्हें इन हालातों के कारण पढ़ा लिखा नहीं सके और बेबसी में मजदूरी करने लगे. लेकिन अब जिंदगी को बेहतर बनाना है.– विश्वजीत

– भगवान ने हमारी वर्षों की पुकार सुन ली. अब हमें रहने को घर व काम करने को खेत मिलेंगे. सरकार ने हमारी सुध ली है इसके लिए धन्यवाद करते हैं. – नारायणचंद्र

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