Kanpur: BJP पार्षदों में कलह- उपनेता सदन ने चला इस्तीफे का दांव, ये है अड़चन

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ABC News: नगर निगम में भाजपा के पार्षद दल में लंबे समय से जो चिंगारी शांत पड़ी थी, वह अब फिर तेजी से सुलग रही है. सदन में अपशब्द और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के बाद जिस तरह से भाजपा पार्षद दल के उपनेता महेंद्र शुक्ल दद्दा के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और फिर उन्हीं की पार्टी के पार्षदों ने महेंद्र शुक्ल की गिरफ्तारी के लिए धरना दिया. उसके बाद मामला और बढ़ गया है. मामला प्रदेश संगठन तक पहुंच गया है और इधर उपनेता सदन ने अपने पद से भी इस्तीफा दे दिया. हालांकि, उपनेता सदन इस्तीफे का दांव पहले भी हुए विवादों के दौरान चल चुके हैं.

भाजपा पार्षद दल के उपनेता महेंद्र शुक्ल ने खुद पर कब्जे के आरोप के बाद अपनी ही पार्टी के पार्षद रमेश हटी को अपशब्द और जातिसूचक शब्द कहे थे. जिस पर स्वरूपनगर थाना में उनके उपर मुकदमा दर्ज हो गया है. एक दिन पहले भाजपा पार्षदों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग और सदस्यता खत्म करने को लेकर धरना भी दिया. वहीं, स्थानीय संगठन अभी प्रदेश नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रहा है. इस बीच शुक्रवार को उपनेता सदन महेंद्र शुक्ल ने अपने पद से इस्तीफे का दांव चल दिया. बताया गया कि महेंद्र शुक्ल ने क्षेत्रीय अध्यक्ष बुंदेलखंड और भाजपा के उत्तर जिलाध्यक्ष सुनील बजाज को इस्तीफा की कापी दी है. इसमें कहा गया है कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई है. इसके चलते अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूं. पत्र में उन्होंने कहा कि महापौर द्वारा उनको सदन से छह माह के लिए निष्कासित कर दिया गया है तो एससीएसटी न एक्ट में मुकदमा दर्ज कराये जाने की अनुमति दिया जाना न्यायोचित नहीं है. एक ही अभियोजन के लिए दो तरह का दंड दिया जाना अधिनियम में नहीं है.

इस्तीफे में ऐसे फंसा पेंच
दरअसल, उपनेता सदन ने इस्तीफे का दांव काफी सोच समझकर चला है. इससे पहले भी जब उनका महापौर से विवाद सुर्खियों में रहा था, तब भी कुछ इसी तरह उन्होंने इस्तीफे का दांव चला था. दरअसल, नगर निगम अधिनियम के जानकार कहते हैं कि अगर पार्षद दल के उपनेता को इस्तीफा देना ही है, तो उन्हें अपने इस्तीफे को महापौर को देना होगा. इस्तीफा जब महापौर के पास पहुंचेगा, तो उसमें वह पार्षद के हस्ताक्षर का मिलान कराएंगी. हस्ताक्षर सही पाए जाने पर पार्षद का इस्तीफा स्वत: स्वीकार हो जाएगा. हालांकि, कहा जा रहा है कि महेंद्र शुक्ल ने अपने इस्तीफे में महापौर को भी सूचनार्थ लिखा है. ऐसे में अगर संगठन की तरफ से महापौर को इस्तीफे की प्रतिलिपि भेजी जाती है और महापौर उसे स्वीकार कर लेती है, तब कहीं जाकर पार्षद दल उपनेता का इस्तीफा मान्य होगा.


रिपोर्ट: सुनील तिवारी

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