हरियाली तीज: अविवाहित लड़कियों को मिलता है मनचाहा जीवन साथी, जानें व्रत के नियम

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ABC News:  आज हरियाली तीज 2019 का पर्व है.इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए दिन-भर व्रत रखती हैं.  यही नहीं अच्‍छे पति की कामना के लिए अविवाहित लड़कियां भी इस व्रत को रखती हैं. मान्‍यता है कि हरियाली तीज का व्रत रखने से विवाहित स्त्रियों के पति की उम्र लंबी होती है, जबकि अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवन साथी मिलता है. सौभाग्य और श्रृंगार को समर्पित इस पर्व पर महिलाएं और बच्चियां हाथ-पैरों में मेहंदी और आल्ता या महावर लगाती हैं। हरियाली तीज पर पति-पत्नी को एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं. 

पूजा मुहूर्त
इस बार हरियाली तीज पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 31 मिनट से रात 10 बजकर 21 मिनट तक बन रहा है। इस दौरान मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. 

 

हरतालिका तीज के व्रत के नियम

1. इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्‍याएं रखती हैं.लेकिन एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है.

2.  अगर महिला ज्‍यादा बीमार है तो उसके बदले घर की अन्‍य महिला या फिर पति भी इस व्रत को रख सकता है.

3. व्रत करने वाली महिला को किसी पर भी गुस्‍सा नहीं करना चाहिए. 

4. व्रत करने वाली महिला को पति के साथ क्‍लेश नहीं करना चाहिए. मान्‍यता है कि ऐसा करने से व्रत अधूरा रह जाता है.

5. अगर आप इस व्रत को रख रही हैं तो किसी बुजुर्ग का अपमान न करें. मान्‍यता है कि ऐसा करने से व्रत का प्रताप नहीं मिलता है.

6. इस व्रत में सोने की मनाही है. यहां तक कि रात को भी सोना वर्जित है. रात के वक्‍त भजन-कीर्तन किया जाता है.

7. व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाने के बाद ही छोड़ा जाता है.

 तीज व्रत से जुड़ी खास बातें

हरियाली तीज व्रत करने के पीछे कथा है कि मां पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए बहुत ही कठिन तपस्या की थी। इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आज ही के दिन यानी श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तीज को मां पार्वती के सामने प्रकट हुए और उनसे शादी करने का वरदान दिया था.मान्यता है कि हरियाली तीज के दिन महिलाएं पुत्र प्राप्ति की इच्छा के लिए व्रत करती हैं जबकि कन्या मनवांछित वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत करती हैं.

इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और  शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं.पूजा के बाद मिट्टियों की इन मूर्तियों को नदी या किसी पवित्र जलाशय में प्रवाहित करने की मान्यता है.व्रत करने वाले भक्त सुबह स्नान कर और मां-पार्वती की विधिवत पूजा कर इस व्रत को शुरू करते हैं. कुछ स्‍थानों पर मां पार्वती और शिवलिंग की पूजा के वक्त मां पार्वती को शंकर जी वर के रूप में कैसे प्राप्त हुए इसकी कथा भी सुनाई जाती है. इस कथा को हरियाली तीज कथा के नाम से भी जानते हैं.

मान्यता के इस व्रत के दौरान पूरे दिन मां पार्वती और भगवान शिव का ही ध्यान करना चाहिए. व्रत खोलने से पहले भगवान को खीर पूरी या हलुआ और मालपुए से भोग लगाना चाहिए. विवाहित महिलाएं इस दिन जब पूजा के लिए तैयार होती हैं तो सोलह श्रृंगार करती हैं. हरियाली तीज की पूजा सामग्री के रूप में गीली मिट्टी, पीले रंग का नया कपड़ा, बेल पत्र, कलावा, धूप-अगरबत्ती, कपूर, घी का दीपक, फूल-फल, नारियल और पंचामृत आदि  इस्तेमाल कर सकते हैं.


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