सूतक काल और ग्रहण के समय कर सकते हैं ये शुभ काम…जानें यहां

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ABC News: सूतक काल में और ग्रहण के समय में पूजा-पाठ वर्जित रहते हैं, लेकिन इस दौरान मंत्रों का जाप किया जा सकता है. मंत्र जाप मानसिक रूप से करना चाहिए यानी बिना आवाज किए मन ही मन अपने प्रिय देवता के मंत्रों का जाप करना चाहिए. मंत्र जाप घर में बैठकर ही करना चाहिए. ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. इस संबंध में मान्यता है कि ग्रहण की वजह से चंद्र से हानिकारक तरंगे निकलती हैं, जिनसे वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इस ऊर्जा के प्रभाव से हमें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है.

शिवजी के लिए ऊँ नम: शिवाय, विष्णुजी के लिए ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, श्रीकृष्ण के लिए कृं कृष्णाय नम:, श्रीराम के लिए रां रामाय नमः, हनुमानजी के लिए ऊँ रामदूताय नम:, चंद्र के लिए सों सोमाय नम:, देवी मां के लिए ऊँ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः मंत्रों का जाप किया जा सकता है.ग्रहण के समय ग्रंथों का जैसे महाभारत, रामायण या किसी अन्य ग्रंथ का पाठ किया जा सकता है.

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या-क्या करें

  • ग्रहण की समाप्ति 17 जुलाई की सुबह 4.30 बजे होगी। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें. स्वयं स्नान करें। घर के मंदिर में विराजित भगवान की प्रतिमाओं को स्नान कराएं. पूजा करें.
  • पूजा के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को धन का और अनाज का दान करें. किसी मंदिर में पूजन सामग्री दान करें.
  • गाय को हरी घास खिलाएं, गौशाला में धन का दान करें. माता-पिता का आशीर्वाद लें.

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